अंतरिक्ष में चट्टानें काट सकेगी क्या ये तलवार

सदियों से जापान के समुराई योद्धाओं के लिए बनाई जाने वाली ये तलवारें बेहद धारदार और मज़बूत होती हैं. ये अच्छे से

Posted 1 year ago in News and Politics.

User Image
Rohini panwar
10 Friends
5 Views
51 Unique Visitors
ऑनलाइन आपको तमाम ऐसे वीडियो मिल जाएंगे जिसमें धारदार समुराई तलवारों से लकड़ी के मोटे गट्ठरों से लेकर पाइप तक काटते दिखेंगे. जापानी भाषा में समुराई तलवारों को 'कटाना' कहते हैं. अब तीन इंजीनियर, जापान के एक मशहूर तलवार निर्माता के साथ मिलकर इसी लोहे से एक मशीन बनाने में जुटे हैं, जो उल्कापिंड से चट्टानों के नमूने काट कर ले आएगी. जापान के अंतरिक्ष मिशन हयाबूसा के जरिए अंतरिक्ष यान रियूगू नाम के उल्कापिंड की पड़ताल के लिए भेजे गए हैं. इनमें उल्कापिंड का चक्कर लगाने वाले यान से लेकर इस पर क़दम रखने वाले रोवर तक शामिल हैं. लेकिन कोई भी मिशन इस उल्कापिंड से चट्टानों के नमूने नहीं ला सका. हर बार मिशन नाकाम रहा. एक लेख में जापान के कनागावा इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के ताएको वातानाबे और 70 साल के जेनरोकुरो मत्सुनागा ने मिलकर इस मिशन के बारे में विस्तार से लिखा है. Image copyrightGO MIYAZAKI/WIKIMEDIA COMMONS तामाहागाने से बनेगी अंतरिक्ष के लिए मशीन मत्सुनागा समुराई तलवारें बनाने के उस्ताद हैं. उन्होंने नई तकनीक की मदद से ऐसी कटाई मशीन बनाई है जिसमें तामाहागाने का इस्तेमाल हुआ है. तामाहागाने, लोहे और तारकोल से बनता है. इसी से मशहूर जापानी तलवारें बनाई जाती हैं. इनकी धार बहुत तेज़ होती है. दोनों ने लिखा है कि जापानी तलवार की मज़बूती का फ़ायदा उठाने के लिए ही हमने अंतरिक्ष भेजी जाने वाली इस मशीन को तामाहागाने से बनाया है. मत्सुनागा ने जापान के समुद्री तटों पर मिलने वाली लोहे के कणों वाली बालू को इकट्ठा किया. फिर उसे गलाकर तपाया ताकि तामाहागाने तैयार कर सकें. इस प्रक्रिया में लोहे के कणों को ख़ूब तेज़ गर्म करके फिर ठंडा किया जाता है. ये प्रक्रिया कई बार करने से लोहा बहुत सख़्त हो जाता है. इस से कठोर से कठोर चीज़ काटी जा सकती है. इस लोहे से गोलाकार यंत्र तैयार हुए हैं जिनकी धार ब्लेड जैसी है. जो अंदर की तरफ़ मुड़े हुए हैं. असल में जापान के अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस यंत्र को अंतरिक्ष यान से रियूगू उल्कापिंड पर भेजना चाहते हैं. फिर जैसे आइसक्रीम को निकालने वाला स्कूप होता है, ठीक उसी तरह इस यंत्र से उल्कापिंड की मिट्टी और चट्टानें निकालकर वापस धरती पर लाने की योजना है. भारतीय को अंतरिक्ष ले जाएगा ये 'बाहुबली' रॉकेटवो तस्वीरें जो अंतरिक्ष को जीवंत कर देती हैं Image copyrightJAXA/UNIVERSITY OF TOKYO Image captionरियूगू उल्कापिंड अंतरिक्ष से सैंपल लाना कितना मुश्किल 2005 में हयाबूसा के एक मिशन के दौरान जापान के वैज्ञानिकों को अंदाज़ा हो गया था कि किसी उल्कापिंड से चट्टानों के सैंपल लाना कितना मुश्किल है. रियूगू से चट्टानों के नमूने लाने की दो कोशिशें नाकाम रही थीं. जो मशीनें भेजी गई थीं, वो कुछ धूल के कण ही वापस धरती पर ला सकी थीं. इतने छोटे नमूने की ठीक से पड़ताल नहीं हो सकती. सो, अब नये हयाबूसा मिशन के ज़रिए एक बार फिर उल्कापिंड से चट्टानों के नमूने जमा करने की तैयारी हो रही है. समुराई तलवारों की तकनीक की मदद से शायद उल्कापिंड की चट्टानें काटना ज़्यादा आसान हो. असल में उल्कापिंड की सतह लाखों बरस से ब्रह्मांड की किरणों की बौछार झेल चुकी होती हैं. इस पर रेडियोएक्टिव किरणों से लेकर सूरज की एक्स-रे तक कहर बरपा चुकी होती है. हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फ़ॉर एस्ट्रोफ़िजिक्स के मार्टिन एल्विस कहते हैं, ''उल्कापिंड के नमूने हमें सौरमंडल के इतिहास के बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं. इसके लिए हमें उसके सीने से चट्टानों के नमूने निकालने होंगे. गहरी खुदाई की ज़रूरत होगी.'' दिक़्क़त ये है कि उल्कापिंड हल्के होते हैं. इनमें गुरुत्वाकर्षण नहीं होता. तो बहुत ज़ोर से किसी चीज़ से चोट पहुंचाने पर वो अक्सर उछल जाते हैं. मार्टिन एल्विस कहते हैं कि, ''कोई भी ऐसी चीज़ जो कम ताक़त का इस्तेमाल करके उल्कापिंड की सतह के भीतर से नमूने निकाल लाए, तो बेहतर रहे. तामाहागाने स्टील इसमें कारगर साबित हो सकता है.''

More Related Blogs

Back To Top