कभी 10 रुपए था होटल ताज का किराया, पहले विश्व युद्ध के दौरान यह हो गया था 600 बेड वाला हॉस्पिटल

ताज होटल, रिसॉर्ट्स एंड पैलेस' का एक हिस्सा, यह इमारत इस समूह की प्रमुख संपत्ति मानी जाती है, जिसमे 560 कमरे एवं 44 सुइट्स हैं। होटल ताज देश की पहली ट्रेडमार्क इमारत बन गई है। अब कोई भी इस होटल के फोटो का अपने बिजनेस के फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। ताज दुनिया की उन चुनिंदा इमारतों में शामिल

Posted 4 months ago in History and Facts.

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Raj Singh
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THEHOOK DESK:मुंबई की कोलाबा नमक जगह पर स्थित ताज महल पैलेस को कौन नहीं जानता है। ये होटल पांच सितारा होटल है जो कि गेटवे ऑफ़ इंडिया के पास है।


'ताज होटल, रिसॉर्ट्स एंड पैलेस' का एक हिस्सा, यह इमारत इस समूह की प्रमुख संपत्ति मानी जाती है, जिसमे 560 कमरे एवं 44 सुइट्स हैं। होटल ताज देश की पहली ट्रेडमार्क इमारत बन गई है। अब कोई भी इस होटल के फोटो का अपने बिजनेस के फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। ताज दुनिया की उन चुनिंदा इमारतों में शामिल हो गया है, जो ट्रेडमार्क हैं।
इनमें न्यूयॉर्क की एम्पायर स्टेट बिल्डिंग, पेरिस का एफिल टावर और सिडनी का ऑपेरो हाउस भी शामिल है।

लेकिन यह पहली बार नहीं है, जब ताज के साथ "पहला' जुड़ा है। 16 दिसंबर 1903 को होटल खुला। ताज महल होटल 114 साल पुरानी इमारत है। मुंबई (तब बंबई) का यह पहला होटल था, जिसमें बिजली थी। उस दिन 17 मेहमान इस होटल में थे। होटल ताज देश का पहला होटल था जिसे बार (हार्बर बार) और दिन भर चलने वाले रेस्त्रां का लाइसेंस मिला था। 1972 में देश की पहली 24 घंटे खुली रहने वाली कॉफी शॉप यहीं थी।



ताज पहला रेस्त्रां है, जहां सबसे पहले एसी रेस्त्रां बनाया गया था। 1933 में... हार्बर बार और एसी रेस्त्रां का निर्माण हुआ था। ताज देश का पहला होटल था, जिसमें इंटरनेशनल स्तर का डिस्कोथेक था। जर्मन एलीवेटर्स लगाए गए थे। तुर्किश बाथ टब और अमेरिकन कंपनी के पंखे लगाए गए थे।



ताज देश का पहला ऐसा होटल था, जिसमें अंग्रेज बटलर्स हायर किए गए थे। शुरुआती चार दशकों तक होटल का किचन फ्रेंच शेफ ही चलाते थे। आतंकी हमले के बाद बराक ओबामा इस होटल में रुकने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष थे।

पहले विश्व युद्ध के दौरान होटल को 600 बेड वाले हॉस्पिटल में बदल दिया गया था। होटल की शुरुआत में सिंगल रूम का किराया दस रुपए था। पंखे व अटैच्ड बाथरूम वाले कमरों का किराया ‌‌13 रूपए था। इतिहासकार शारदा द्विवेदी की किताब में इसका जिक्र है। आर्किटेक्ट सीताराम खांडेराव वैद्य और डीएन मिर्जा ने होटल का डिजाइन बनाया। सीताराम की मृत्यु के बाद अंग्रेज आर्किटेक्ट डब्ल्यू ए चैंबर्स ने इसे पूरा करवाया।



ऐसा कहा जाता है कि जमशेदजी टाटा ने होटल का निर्माण इसलिए करवाया था क्योंकि उन्हें "फोर व्हाइट ओनली' होटल में घुसने से रोक दिया गया था। लेकिन इतिहासकार शारदा द्विवेदी अपनी किताब में बताती हैं - 1896 के वक्त बंबई में प्लेग फैला था, लोग बंबई आने से झिझकते थे। ऐसे समय बंबई के प्रति अपना प्रेम दर्शाने के लिए जमशेदजी ने होटल ताज बनवाया था।

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