कहानी : ताजपुर जंगल में आतंकी

ताजपुर जंगल में शाम का समय था। हल्की-हल्की सर्द हवा बह रही थी। 

Posted 11 months ago in Other.

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deepika mandloi
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बीनू बाज भी आसमान के रास्ते अपने घोंसले की तरफ जा रहा था। आज वह अपने घोंसले से बहुत दूर आ गया था इसलिए वह जल्दी से उड़कर अपने घर पहुंचना चाहता था। अचानक उसकी निगाह नीचे एक पहाड़ी की ओट में पड़ी। उसने देखा कि चार भेड़िये अपने मुंह पर कपड़ा बांधे और अपने आपको दूसरे जानवरों से बचाते व छुपाते हुए ताजपुर के जंगल की तरफ बढ़ रहे थे।    बीनू बाज को उनकी इस हरकत पर कुछ शक हुआ। उसने एक बार तो सोचा कि मरने दो मुझे क्या? लेकिन उसने सुन रखा था कि उसके जंगल पर आने वाले नए साल के मौके पर कुछ आतंकी हमला कर सकते हैं, तो उसने उन चारों भेड़ियों की हरकत के बारे में पता लगाने का निश्चय किया।   वह धीरे से नीचे आया और एक पेड़ पर छुपकर बैठ गया। अब बीनू बाज तो उन चारों भेड़ियों को देख सकता था लेकिन वो चारों उसको नहीं देख सकते थे। वो चारों भेड़िये भी उसी पेड़ के नीचे आकर बैठ गए। काले बादलों की वजह से अंधेरा होने लगा था।   चारों भेड़ियों में से एक बोला- बस अब थोड़ी देर की बात है, जब ताजपुर जंगल के सब जानवर सो जाएंगे और फिर हम उन पर हमला कर देंगे।    दूसरा बोला- हां, सब अपने-अपने हथियार चेक कर लो। इतना कहने पर सबने अपने थैलों में छिपाई हुई आधुनिक बंदूक को निकालकर देखा और सबने एकसाथ कहा- सब ठीक है।    अब बीनू बाज भी घबरा गया और उसका शक ठीक था। अब उसने सोचा कि सब जंगल वालों को इसके बारे में बताना चाहिए जिससे कि वो अपने बचाव में कुछ कर सकें। वह तुरंत धीरे से उस पेड़ से उड़ा और अपने ताजपुर जंगल के द्वार पर पंहुचा। डर और घबराहट से वह पसीने पसीने हो रहा था।    उसको इस हालत में देखकर खेमू खरगोश बोला- अरे बीनू इतना घबराए और बदहवास से कहां भागे जा रहे हो?    इतना सुनकर बीनू बाज रुका और नीचे आकर खेमू खरगोश के पास बैठ गया। उसने जल्दी से उन आतंकी भेड़ियों की बात उसे बताई। अब खेमू खरगोश भी परेशान हो गया और काफी घबरा गया।    बीनू बाज जाने लगा और बोला- मुझे सारे जंगलवासियों को बताना पड़ेगा।   इतना सुनकर खेमू खरगोश बोला- बीनू यदि तुम ये बात सारे जंगल को बताओगे तो सारे जंगलवासी घबरा जाएंगे तथा जंगल में ज्यादा हलचल और भगदड़ मच जाएगी। इसे देखकर हो सकता है कि वो भेड़िये आज हमला ना करके फिर कभी करें और हो सकता है कि अगली बार हमें ना पता लगे कि वो कब हमला करेंगे इसलिए उन्हें हमें आज ही पकड़ना पड़ेगा और अपने जंगल को भी बचाना पड़ेगा। बीनू बाज को खेमू खरगोश की बात में दम लग रहा था।    वह थोड़ी देर चुप होकर बोला- फिर हम दोनों कैसे अकेले अपने जंगल को बचाएं?    खेमू खरगोश बोला- हम दोनों ये नहीं कर सकते इसलिए हमें और साथी लेने पड़ेंगे, हमारे पास समय है। वो लोग सबके सो जाने पर ही हमला करेंगे। अब हल्की बरसात शुरू हो चुकी थी।    इतने में खेमू खरगोश बोला- मुझे एक तरकीब सूझी है, तुम मेरे पीछे आओ।   खेमू खरगोश और बीनू बाज जल्दी से ताजपुर जंगल के सेनापति चीनासिंह चीता के पास पहुंचे और उन्हें सारी बातें जल्दी-जल्दी बताईं। वो उनकी इस बात से सहमत थे कि उन्हें हमें आज ही और बिना किसी शोर-शराबे के पकड़ना पड़ेगा

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deepika mandloi 1 year ago 3 Views
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