छत पर प्रैक्टिस करने वाले इस क्रिकेटर ने इंडिया की वर्ल्ड कप टीम में जगह पा ली

निदाहास ट्रॉफी के फाइनल का हीरो सबको याद है. दिनेश कार्तिक. कैसे बंदे ने आखिरी बॉल पर छक्का मारके मैच जिता दिया था. पर ये मैच आखिरी बॉल और आखिरी छक्के तक पहुंचा किसकी कृपा से. नाम विजय शंकर. सबको याद होगा जब विजय क्रीज पर आए तो टीम को 69 रन चाहिए थे 40 गेंदों पर. पर विजय के बल्ले पर उस दिन गेंद आ ही

Posted 7 months ago in Sport.

User Image
Bhaskar sain
18 Friends
37 Views
6 Unique Visitors
निदाहास ट्रॉफी के फाइनल का हीरो सबको याद है. दिनेश कार्तिक. कैसे बंदे ने आखिरी बॉल पर छक्का मारके मैच जिता दिया था. पर ये मैच आखिरी बॉल और आखिरी छक्के तक पहुंचा किसकी कृपा से. नाम विजय शंकर. सबको याद होगा जब विजय क्रीज पर आए तो टीम को 69 रन चाहिए थे 40 गेंदों पर. पर विजय के बल्ले पर उस दिन गेंद आ ही नहीं रही थी. सबसे मुश्किल रहीं मुस्तफिजुर रहमान की गेंदें. विजय पर इंटरनैशनल क्रिकेट का प्रेशर साफ दिख रहा था. 18वें ओवर में विजय लगातार चार गेंदें झेल गए. अब दो ओवर में टीम इंडिया को 34 रन चाहिए थे. वो तो कहो कार्तिक ने आखिरी में हौंक दिया. वरना बांग्लादेश के हाथों हार तय थी.
18 मार्च 2018 का ये दिन विजय शंकर के लिए हादसे से कम नहीं था. ट्रॉफी जीतने के बाद टीम जश्न मना रही थी. पर विजय खोए-खोए से पीछे खड़े थे. सोशल मीडिया पर विजय शंकर को ट्रोल किया जाने लगा. सोशल मीडिया पर कम ऐक्टिव रहने वाले विजय शंकर ने ईएसपीएन क्रिकइंफो से कहा कि इस ट्रोलिंग से वो कुछ दिन परेशान रहे. पर फिर इसने उनको और मजबूत बनाया. प्रेशर हैंडलिंग और मुश्किल स्थितियों का सामना करना और मजबूती से सिखाया. विजय को दिनेश कार्तिक और रोहित शर्मा ने भी समझाया कि उनके साथ जो हुआ वो किसी के साथ भी हो सकता है.
विजय ने दोनों सीनियर्स की बात को माना और क्रिकेट में मन लगाया. खूब मेहनत की और 15 अप्रैल 2019 को जब इंडिया के सलेक्टर्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वर्ल्ड कप के लिए टीम का ऐलान किया तो विजय शंकर का नाम उसमें शामिल था. शंकर को अंबाती रायडू की जगह टीम में शामिल किया गया. वो अंबाती जिनकी पिछले 6 महीने से टीम में जगह पक्की मानी जा रही थी. शंकर की सलेक्शन के पीछे कारण दिया गया कि उनके आने से टीम में बैटिंग, बॉलिंग और अच्छी फील्डिंग आ जाती है.
निदाहस ट्रॉफी के उस बुरे सपने को भूलकर शंकर इंडिया ए और तमिलनाडु के लिए अच्छा खेले. दिसंबर 2018 में वो इंडिया ए की तरफ से न्यूजीलैंड गए. वहां उन्होंने इंडिया की तरफ से सबसे ज्यादा 188 रन बनाए. 94 के एवरेज और 105 के स्ट्राइक रेट से. इंडिया ए ने ये सीरीज 3-0 से जीती. न्यूजीलैंड में इसी परफॉर्मेंस का नतीजा था कि विजय शंकर को टीम इंडिया की वनडे टीम के लिए बुलावा आया. हार्दिक के करन जौहर कांड के बाद टीम से बाहर निकाले जाने पर टीम को एक ऑलराउंडर की जरूरत थी. इसी में विजय शंकर का नंबर लगा और भारत की ओर से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच में वन-डे डेब्यू किया.
विजय शंकर की सबसे खास बात ये है कि वो ऑलराउंडर हैं. अपने देश में वैसे भी ऑलराउंडरों की कितनी किल्लत रही है. सब जानते हैं. और अपने यहां ऑलराउंडर होगा भी तो वो बैटिंग के साथ स्पिन डालता होगा. फास्ट बॉलिंग के साथ बल्ला चला लेने वाले आदमी ईद के चांद की तरह हैं. तो तमिलनाडु के विजय वही ईद के चांद हैं. वो दाएं हाथ से मीडियम तेज गेंदबाजी करते हैं और सीधे हाथ के आक्रामक बल्लेबाज हैं. निदाहास ट्रॉफी के फाइनल में भले विजय बड़े शॉट्स नहीं खेल पाए, मगर डोमेस्टिक क्रिकेट में वो अपने बड़े-बड़े शॉट्स के लिए ही जाने जाते हैं.
पिता और भाई का खूब साथ मिला
विजय के यहां तक पहुंचने में उनके पिता और भाई अजय का बड़ा रोल है. अजय ने तमिलनाडु के लिए लोवर डिविजन क्रिकेट खेला है. इन्हीं ने विजय के लिए घर की छत पर नेट्स लगा दिए थे ताकि विजय प्रैक्टिस कर सकें. शंकर को अब आप फास्ट बॉल डालते देखते हैं, पर 20 साल की उम्र तक वो ऑफ स्पिन करते थे. पर उन्हें समझ आ गया कि स्पिनरों से भरी तमिलनाडु की टीम में स्पिन से काम नहीं चलेगा. इसीलिए वो तेज गेंदबाजी करने लगे. फायदा भी मिला. 21 साल की उम्र में विजय ने विदर्भ के विरुद्ध अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला. इसमें उन्होंने नाबाद 63 रन बनाए और 2 विकेट भी लिए. पर असली कहर तो विजय ने 2014-15 के रणजी सीजन में ढाया. जब उन्होंने 57.70 के एवरेज से 577 रन बनाए. इसमें दो सेंचुरी और दो हाफ सेंचुरी थी. हालांकि वो बीच कप में चोटिल हो गए और वापस लौटे. पर जनता जान चुकी थी कि कोई विजय शंकर नाम का लड़का रणजी में फोड़ रहा है.
विजय के डोमेस्टिक करियर की बात करें तो अभी तक 41 फर्स्ट क्लास मैचों में 47.70 के औसत के साथ उन्होंने 2099 रन बनाए हैं. लिस्ट-ए करियर को देखें तो विजय के नाम 58 मैचों में 37.12 के औसत से 1448 रन हैं. टी20 की बात करें तो उन्होंने अभी तक 59 मैचों में 27.26 के औसत और 126.23 के स्ट्राइक रेट के साथ 818 रन बनाए हैं.
पर ये सारा स्ट्राइक रेट, एवरेज, स्कोर और ऑलराउंडर होने की कला टीम इंडिया के कितने काम आती है. असली चीज यही देखने वाली होगी. विजय को एक और चीज समझ लेनी चाहिए कि उन्हें ये मौका बड़ी किस्मत से मिला है. या कहें हार्दिक के बैड लक के कारण. क्योंकि हार्दिक ही फिलहाल ऑलराउंडर के तौर पर विराट कोहली की पहली पसंद हैं. ऐसे में विजय इस मौके को जितना ज्यादा से ज्यादा भुना लें, वही उनके करियर के लिए अच्छा है.
Tags: #sport,

More Related Blogs

Article Picture
Bhaskar sain 7 months ago 15 Views
Back To Top