जानना चाहते थे पृथ्वी का रहस्य इसलिए खोद डाला कई किमी गड्ढा, तभी हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश

कि बोरहोल है। कोला सुपरदीप बोरहोल नामक इस छेद को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने शुरू किया था। इस गड्ढे को खोदने का मुख्य मकसद अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देना था। और साथ ही साथ पृथ्वी की गहराई के बारे में कुछ अनसुलझी बातों को पता लगाना थामें सक्षम थी। मल्टी लेवल ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की लक्

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mehrvan parmar
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जानना चाहते थे पृथ्वी का रहस्य इसलिए खोद डाला कई किमी गड्ढा, तभी हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश
26 Apr. 2019 11:32

Cyber kida
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रूस में एक जगह है जहां दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा यानी कि बोरहोल है। कोला सुपरदीप बोरहोल नामक इस छेद को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने शुरू किया था। इस गड्ढे को खोदने का मुख्य मकसद अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देना था। और साथ ही साथ पृथ्वी की गहराई के बारे में कुछ अनसुलझी बातों को पता लगाना था।


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वैज्ञानिकों ने लगातार 19 साल तक खुदाई की और अंततः 19 साल के कठिन परिश्रम के बाद वैज्ञानिक 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच गए थे। यह एक ऐसी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार को भी आसानी से कवर किया जा सकता था। इस खनन को सफलता पूर्वक अंजाम देने के लिए यूरालमश नाम की एक विशाल ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी स्थिति में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेवल ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की लक्ष्य गहराई 15,000 मीटर (49000 फीट) थी।


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सालों की मेहनत के बाद, जब रूसी वैज्ञानिक 262 मीटर (40,230 फीट) की गहराई तक पहुंचे, तो मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। जब वैज्ञानिकों ने तापमान को मापा तो उनके होश उड़ गए। दरअसल उस समय जमीन का तापमान 180 डिग्री सेल्सियस से था। यही नहीं, तापमान में लगातार वृद्धि होती जा रही थी। यह देखते ही तुरंत काम बंद करने का आदेश दे दिया गया। तब वैज्ञानिकों ने इस छेद को डोर टू हेल नाम दिया। इसके बाद इसके विघटन के बाद सोवियत संघ की खुदाई को फिर से शुरू नहीं किया गया था।


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भूमि में 12 किलोमीटर की खुदाई अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह सतह से पृथ्वी की कोर तक की गहराई का 0.2 प्रतिशत भी नहीं है। जी हाँ, आपने सही सुना! दरअसल हमारे पृथ्वी की निचली सतह तकरीबन 6371 किमी नीचे है। जहाँ तक पहुँचने की कल्पना करना भी बेकार है। इसलिए कहा गया है कि पृथ्वी की गहराई और आसमान की ऊँचाई मापना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।जानना चाहते थे पृथ्वी का रहस्य इसलिए खोद डाला कई किमी गड्ढा, तभी हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश
26 Apr. 2019 11:32

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रूस में एक जगह है जहां दुनिया का सबसे गहरा गड्ढा यानी कि बोरहोल है। कोला सुपरदीप बोरहोल नामक इस छेद को 1970 में रूस के वैज्ञानिकों ने शुरू किया था। इस गड्ढे को खोदने का मुख्य मकसद अमेरिकी वैज्ञानिकों को चुनौती देना था। और साथ ही साथ पृथ्वी की गहराई के बारे में कुछ अनसुलझी बातों को पता लगाना था।


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वैज्ञानिकों ने लगातार 19 साल तक खुदाई की और अंततः 19 साल के कठिन परिश्रम के बाद वैज्ञानिक 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच गए थे। यह एक ऐसी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार को भी आसानी से कवर किया जा सकता था। इस खनन को सफलता पूर्वक अंजाम देने के लिए यूरालमश नाम की एक विशाल ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी स्थिति में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेवल ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की लक्ष्य गहराई 15,000 मीटर (49000 फीट) थी।


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सालों की मेहनत के बाद, जब रूसी वैज्ञानिक 262 मीटर (40,230 फीट) की गहराई तक पहुंचे, तो मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। जब वैज्ञानिकों ने तापमान को मापा तो उनके होश उड़ गए। दरअसल उस समय जमीन का तापमान 180 डिग्री सेल्सियस से था। यही नहीं, तापमान में लगातार वृद्धि होती जा रही थी। यह देखते ही तुरंत काम बंद करने का आदेश दे दिया गया। तब वैज्ञानिकों ने इस छेद को डोर टू हेल नाम दिया। इसके बाद इसके विघटन के बाद सोवियत संघ की खुदाई को फिर से शुरू नहीं किया गया था।


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भूमि में 12 किलोमीटर की खुदाई अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह सतह से पृथ्वी की कोर तक की गहराई का 0.2 प्रतिशत भी नहीं है। जी हाँ, आपने सही सुना! दरअसल हमारे पृथ्वी की निचली सतह तकरीबन 6371 किमी नीचे है। जहाँ तक पहुँचने की कल्पना करना भी बेकार है। इसलिए कहा गया है कि पृथ्वी की गहराई और आसमान की ऊँचाई मापना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।जानना चाहते थे पृथ्वी का रहस्य इसलिए खोद डाला कई किमी गड्ढा, तभी हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश
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वैज्ञानिकों ने लगातार 19 साल तक खुदाई की और अंततः 19 साल के कठिन परिश्रम के बाद वैज्ञानिक 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच गए थे। यह एक ऐसी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार को भी आसानी से कवर किया जा सकता था। इस खनन को सफलता पूर्वक अंजाम देने के लिए यूरालमश नाम की एक विशाल ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी स्थिति में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेवल ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की लक्ष्य गहराई 15,000 मीटर (49000 फीट) थी।


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सालों की मेहनत के बाद, जब रूसी वैज्ञानिक 262 मीटर (40,230 फीट) की गहराई तक पहुंचे, तो मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। जब वैज्ञानिकों ने तापमान को मापा तो उनके होश उड़ गए। दरअसल उस समय जमीन का तापमान 180 डिग्री सेल्सियस से था। यही नहीं, तापमान में लगातार वृद्धि होती जा रही थी। यह देखते ही तुरंत काम बंद करने का आदेश दे दिया गया। तब वैज्ञानिकों ने इस छेद को डोर टू हेल नाम दिया। इसके बाद इसके विघटन के बाद सोवियत संघ की खुदाई को फिर से शुरू नहीं किया गया था।


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भूमि में 12 किलोमीटर की खुदाई अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं है, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह सतह से पृथ्वी की कोर तक की गहराई का 0.2 प्रतिशत भी नहीं है। जी हाँ, आपने सही सुना! दरअसल हमारे पृथ्वी की निचली सतह तकरीबन 6371 किमी नीचे है। जहाँ तक पहुँचने की कल्पना करना भी बेकार है। इसलिए कहा गया है कि पृथ्वी की गहराई और आसमान की ऊँचाई मापना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।जानना चाहते थे पृथ्वी का रहस्य इसलिए खोद डाला कई किमी गड्ढा, तभी हुआ कुछ ऐसा कि उड़ गए होश
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वैज्ञानिकों ने लगातार 19 साल तक खुदाई की और अंततः 19 साल के कठिन परिश्रम के बाद वैज्ञानिक 12.24 किमी गहराई (40,230 फीट) तक पहुंच गए थे। यह एक ऐसी गहराई है, जिसमें 240 फीट के 167 कुतुब मीनार को भी आसानी से कवर किया जा सकता था। इस खनन को सफलता पूर्वक अंजाम देने के लिए यूरालमश नाम की एक विशाल ड्रिलिंग मशीन बनाई गई थी, जो किसी भी स्थिति में ड्रिल करने में सक्षम थी। मल्टी लेवल ड्रिलिंग सिस्टम वाली इस मशीन की लक्ष्य गहराई 15,000 मीटर (49000 फीट) थी।


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