दम मारो दम है चोर पुलिस की कहानी

अपनी आने वाली फिल्म ‘दम मारो दम’ की रिलीज रोके जाने संबंधी याचिका को मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा 

Posted 11 months ago in Other.

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deepika mandloi
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अपनी आने वाली फिल्म ‘दम मारो दम’ की रिलीज रोके जाने संबंधी याचिका को मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद रोहन सिप्पी ने राहत की साँस ली है। फिल्म निर्माता ने कहा है कि उनकी फिल्म की कहानी ‘चोर-पुलिस’ पर आधारित है जिसका किसी के वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। पहले यह फिल्म गोआ और वहाँ की महिलाओं की नकारात्मक छवि पेश करने के आरोपों के कारण विवादों से घिर गई थी। हालाँकि फिल्म ‘शोले’ के निर्माता रमेश सिप्पी के बेटे रोहन सिप्पी ने कहा कि फिल्म में इस तरह की कोई बात नहीं है। सिप्पी ने बताया ‘‘यह फिल्म ‘नो वन किल्ड जेसिका’ नहीं है जिसकी कहानी वास्तविक जीवन पर आधारित थी। ‘दम मारो दम’ एक थ्रिलर फिल्म है जिसका गोआ के किसी सनसनीखेज घटना से कोई लेना-देना नहीं है।साहब! बचपन में ही सिर से मा बाप का साया उठ गया। मेहनत मजदूरी के लिए इधर-उधर हाथ पांव भी मारे। मगर छोटी उम्र का हवाला देकर कर किसी ने काम देने से मना कर दिया। जिससे फुटपाथ पर कई रात भूखे सोकर गुजारी। दूसरों को खाता देखकर भूख और सताती। और कोई रास्ता नजर नहीं आया तो मैंने घरों में चोरी शुरू कर दी। सूरजपुर कोतवाली में चोरी के आरोप में पकड़े गए एक नाबालिग को सुबक सुबककर यह कहते सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति को उससे हमदर्दी होने लगी। मगर अगले दिन जब बच्चे को खोजते हुए परिजन थाने पहुंचे तो सबकी आंखें फटी रह गई। तेरह वर्षीय किशोर को शनिवार रात एक घर में घुसकर चोरी करने के आरोप में पकड़ा गया था। पुलिस ने उसके कब्जे से करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य के जेवरात भी बरामद किए थे। शक्ल से मासूम लगने वाले उस बच्चे से पुलिसकर्मियों ने पूछताछ की तो उसने माता-पिता की मौत की ऐसी कहानी सुनाई जिसे सुनकर एक बार तो पुलिसकर्मी भी हिल गए। मगर रात भर बच्चे के घर न पहुंचने पर उसके माता पिता थाने में पहुंचे तो वहां उसे देखकर वह चौंक गए। उधर पुलिस भी हैरान रह गई। सच्चाई सामने आने पर जब पूछताछ हुई तो उसके कारनामे सुनकर सभी दंग थे। दिन में करता था रेकी सूरजपुर कस्बे में माता पिता के साथ रहने वाला किशोर अब तक चोरी की कई वारदात कर चुका है। उसने बताया कि माता-पिता के काम पर चले जाने के बाद वह भी घर से निकल जाता था। ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों में वह बंद पड़े मकानों को खोजता था। दिन में घर के बाहर जले बल्ब या अखबार पड़े देखकर वह पहचान लेता था कि गृहस्वामी कई दिन से घर पर नहीं हैं। इसके बाद वह लौट आता था। अंधेरा हो जाने पर रात में वह उन मकानों में प्रवेश कर कीमती सामान लेकर चंपत हो जाता था।

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deepika mandloi 1 year ago 3 Views
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