धीमी गति से गेहूं का उठान, आढ़ती और किसान परेशान

संवाद सहयोगी, शहजादपुर : कछुआ गति से हो रहे गेहूं के उठान, फसल का भुगतान न होने और बारदाने की समस्या को लेकर आढ़तियों व किसानों को भारी परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों व किसानों में सरकार व प्रशासन के प्रति भारी रोष है।

Posted 7 months ago in Other.

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Narban mharvan
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आढ़तियों ने कहा कि गेहूं का सीजन इस बार पहले ही मौसम की वजह से देर से शुरू हुआ है। इस सीजन में गेहूं की खरीद 13 अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसका उठान खरीद एजेंसी द्वारा धीमी गति से किया जा रहा है। उठान में हो रही देरी के कारण मंडी गेहूं से भरी बोरियों से अटी पड़ी हैं। मंडी एसोसिएशन के प्रधान हरबंस सिंह ने बताया कि लगभग पौने दो लाख कट्टे मंडी में गेहूं के आये हैं जिनमे से केवल 70 हजार का ही उठान हुआ है। उन्होने कहा कि उठान न होने के कारण मंडी का शैड व मंडी परिसर में सारी जगह गेहूं से भरे कट्टे पड़े हैं, जिस कारण मंडी में गेहूं लेकर आने वाले किसानों को समस्या हो रही है, वे अपनी गेहूं की ढेरी कहां लगायें। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल से शुरू हुई गेहूं की खरीद का भुगतान भी आज तक नहीं किया गया। इस कारण किसान पैसे के लिये आढ़तियों के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं, जबकि सरकार 48 घंटे में भुगतान करने और 72 घंटे में लिफ्टिंग की बात कह रही है लेकिन सरकार का यह दावा यहां हवा-हवाई हो रहा है। प्रधान ने बताया कि आढ़तियों को पर्याप्त मात्रा में बारदाना भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। गेहूं की खरीद एकमात्र एजेंसी हैफेड द्वारा की जा रही है।आढ़तियों ने मंडी में आढ़तियों व किसानों की समस्याओं का समाधान करने की सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है। इस अवसर पर राज कलोहा, गोपाल मित्तल, सुधीर मित्तल, अशोक, सुशील, जस्सी, अमित गुलाटी, नवनीत, बलविदर सिंह, आशू, श्याम लाल, रामेश्वरदास के अलावा अनेक आढ़ती व किसान मौजूद थे।आढ़तियों ने कहा कि गेहूं का सीजन इस बार पहले ही मौसम की वजह से देर से शुरू हुआ है। इस सीजन में गेहूं की खरीद 13 अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसका उठान खरीद एजेंसी द्वारा धीमी गति से किया जा रहा है। उठान में हो रही देरी के कारण मंडी गेहूं से भरी बोरियों से अटी पड़ी हैं। मंडी एसोसिएशन के प्रधान हरबंस सिंह ने बताया कि लगभग पौने दो लाख कट्टे मंडी में गेहूं के आये हैं जिनमे से केवल 70 हजार का ही उठान हुआ है। उन्होने कहा कि उठान न होने के कारण मंडी का शैड व मंडी परिसर में सारी जगह गेहूं से भरे कट्टे पड़े हैं, जिस कारण मंडी में गेहूं लेकर आने वाले किसानों को समस्या हो रही है, वे अपनी गेहूं की ढेरी कहां लगायें। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल से शुरू हुई गेहूं की खरीद का भुगतान भी आज तक नहीं किया गया। इस कारण किसान पैसे के लिये आढ़तियों के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं, जबकि सरकार 48 घंटे में भुगतान करने और 72 घंटे में लिफ्टिंग की बात कह रही है लेकिन सरकार का यह दावा यहां हवा-हवाई हो रहा है। प्रधान ने बताया कि आढ़तियों को पर्याप्त मात्रा में बारदाना भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। गेहूं की खरीद एकमात्र एजेंसी हैफेड द्वारा की जा रही है।आढ़तियों ने मंडी में आढ़तियों व किसानों की समस्याओं का समाधान करने की सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है। इस अवसर पर राज कलोहा, गोपाल मित्तल, सुधीर मित्तल, अशोक, सुशील, जस्सी, अमित गुलाटी, नवनीत, बलविदर सिंह, आशू, श्याम लाल, रामेश्वरदास के अलावा अनेक आढ़ती व किसान मौजूद थे।आढ़तियों ने कहा कि गेहूं का सीजन इस बार पहले ही मौसम की वजह से देर से शुरू हुआ है। इस सीजन में गेहूं की खरीद 13 अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसका उठान खरीद एजेंसी द्वारा धीमी गति से किया जा रहा है। उठान में हो रही देरी के कारण मंडी गेहूं से भरी बोरियों से अटी पड़ी हैं। मंडी एसोसिएशन के प्रधान हरबंस सिंह ने बताया कि लगभग पौने दो लाख कट्टे मंडी में गेहूं के आये हैं जिनमे से केवल 70 हजार का ही उठान हुआ है। उन्होने कहा कि उठान न होने के कारण मंडी का शैड व मंडी परिसर में सारी जगह गेहूं से भरे कट्टे पड़े हैं, जिस कारण मंडी में गेहूं लेकर आने वाले किसानों को समस्या हो रही है, वे अपनी गेहूं की ढेरी कहां लगायें। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल से शुरू हुई गेहूं की खरीद का भुगतान भी आज तक नहीं किया गया। इस कारण किसान पैसे के लिये आढ़तियों के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं, जबकि सरकार 48 घंटे में भुगतान करने और 72 घंटे में लिफ्टिंग की बात कह रही है लेकिन सरकार का यह दावा यहां हवा-हवाई हो रहा है। प्रधान ने बताया कि आढ़तियों को पर्याप्त मात्रा में बारदाना भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। गेहूं की खरीद एकमात्र एजेंसी हैफेड द्वारा की जा रही है।आढ़तियों ने मंडी में आढ़तियों व किसानों की समस्याओं का समाधान करने की सरकार व प्रशासन से गुहार लगाई है। इस अवसर पर राज कलोहा, गोपाल मित्तल, सुधीर मित्तल, अशोक, सुशील, जस्सी, अमित गुलाटी, नवनीत, बलविदर सिंह, आशू, श्याम लाल, रामेश्वरदास के अलावा अनेक आढ़ती व किसान मौजूद थे।

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