नरेंद्र मोदी का संघर्षपूर्ण जीवन

नरेंद्र मोदी के बचपन से जुड़ी इन 6 कहानियों को जान लीजिए

Last Modified: Thu, Sep 17 201

Posted 6 months ago in Live Style.

User Image
Raj Singh
113 Friends
4 Views
4 Unique Visitors
नरेंद्र मोदी का बचपन कैसा था? वो बचपन में बाकी बच्चों के जैसे ही थे या फिर शुरु से ही उनके अंदर कुछ अलग था? आइए बताते हैं बाल नरेंद्र के बारे में और उनके बचपन से जुड़े कुछ किस्सों के बारे में।


17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में नरेंद्र मोदी का जन्म हुआ था। पांच भाई-बहनों में नरेंद्र का नंबर तीसरा है। वडनगर रेलवे स्टेशन पर नरेंद्र मोदी के पिता चाय बेचने का काम करते थे। वह स्कूल के बाद सीधा पिता की दूकान पर पहुंच जाते और ग्राहकों को चाय देते। वे रेल के डिब्बों में घूम कर भी चाय बेचते थे।


'कॉमनमैन नरेंद्र मोदी' में किशोर मकवाना लिखते हैं कि स्कूली दिनों में नरेंद्र एनसीसी कैंप में गए जहां से बाहर निकलना मना था। स्कूल के शिक्षक गोवर्धनभाई पटेल ने देखा कि मोदी एक खंबे पर चढ़े हुए हैं तो उन्हें गुस्सा आ गया। लेकिन जब उनकी नज़र इस बात पर पड़ी कि एक फंसे हुए पक्षी को निकालने के लिए नरेंद्र खंबे पर चढ़े हैं तो उनका गुस्सा खत्म हो गया।


हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान स्कूल का रजत जयंती वर्ष था, स्कूल में चारदीवारी नहीं थी और स्कूल के पास इतना पैसा भी नहीं था कि चारदीवारी बनवा सके। नरेंद्र के मन में आया कि छात्रों को भी इस काम में स्कूल की मदद करनी चाहिए। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर नाटक का मंचन किया और इससे जो धनराशि जमा हुई वो स्कूल को चारदीवारी बनवाने के लिए दे दी।


मोदी के घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे जूते खरीद सकें। उनके मामा ने उन्हें सफेद कैनवस जूते खरीद कर दिए। अब जूते गंदे होने तय थे लेकिन नरेंद्र के पास पॉलिश खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे। उन्होंने एक तरीका निकाला, टीचर जो चॉक के टुकड़े फेंक देते थे उन्हें वो जमा कर लेते थे और उनका पाउडर बनाकर भिगोकर अपने जूतों पर लगा लिया करते थे। सूखने के बाद जूते नए जैसे ही लगते थे।


नरेंद्र अपने बचपन के दोस्त के साथ शर्मिष्ठा सरोवर गए थे जहां से वह एक मगरमच्छ के बच्चे को पकड़ लाए। उनका मां हीरा बा ने उनसे कहा कि इसे वापस छोड़कर आओ। बच्चे को कोई यदि मां से अलग कर दे तो दोनों को ही परेशानी होती है। मां की ये बात नरेंद्र को समझ आ गई और वो उस मगरमच्छ के बच्चे को वापस सरोवर में छोड़ आए।


हाल ही में 'मन की बात' में मोदी ने बताया कि वो शहनाई बजाने वालों को इमली दिखाया करते थे ताकि शहनाई बजाने वालों के मुंह में पानी आ जाए और वो शाहनाई ना बजा पाएं। इस पर शहनाईवादक नाराज होकर मोदी के पीछे भी भागते थे। हालांकि उन्होंने कहा कि शरारत के साथ पढ़ाई पर भी ध्यान देना चाहिए। मोदी ने कहा कि उनका मानना है कि शरारतों से ही बच्चे का विकास होता है।

More Related Blogs

Article Picture
Raj Singh 3 months ago 1 Views
Article Picture
Raj Singh 3 months ago 1 Views
Article Picture
Raj Singh 3 months ago 1 Views
Article Picture
Raj Singh 3 months ago 1 Views
Article Picture
Raj Singh 3 months ago 1 Views
Article Picture
Raj Singh 3 months ago 4 Views
Article Picture
Raj Singh 3 months ago 1 Views
Article Picture
Raj Singh 4 months ago 3 Views
Article Picture
Raj Singh 4 months ago 3 Views
Article Picture
Raj Singh 4 months ago 2 Views
Back To Top