नशे और Durgs addiction se परेशान नवयुवक।

आजकल की युवा पीड़ी जा रही हैं नशे के रहा मे नही है कोई रास्ता दिखाने
वाला।जैसे की आप सभी जानते हैं की आज के समय के युवक अपने जीवन मे हार कर अपनी सरी परेशाननी को नशे में झूम कर अपना जीवन जीते हैं।ये चीज से सब परेशान।

Posted 7 months ago in News and Politics.

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Shubhashish Sharma
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UP me sabse jayada-नशे से पीड़ीत है युवक

सुल्तानपुर. तेजी के साथ बढ़ते ड्रग्स के मामलों पर गौर करें तो साफ दिखाई दे रहा है कि ड्रग्स माफिया ने उत्तर प्रदेश को नशे की खाई में पूरी तरह धकेलने की ठान ली है। आलम यह है कि ड्रग्स का जानलेवा धंधा पुलिस की नाक के नीचे दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। पुलिस तस्करों की धरपकड़ के बाद नशे के कारोबार के पूरे नेटवर्क को डाउन करने की बजाए कभी-कभार ड्रग्स तस्करों के खिलाफ छापेमारी कर खानापूर्ति कर रही है। कहीं शिकायत के बावजूद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है।नगर के सब्जीमंडी मोहल्ला निवासी स्व. अजय झा के पुत्र रवि झा उर्फ गोल्डी को स्मैक की लत लग चुकी है। नशा पूरा करने के लिए वह पिछले छह महीने के भीतर घर का मोबाइल, जेवर व अन्य कीमती सामान बेचता चला आ रहा है। घरवाले भी पूरी तरह परेशान हैं। गोल्डी की मां का कहना है कि करीब छह महीना पहले उसके कुछ दोस्तों ने उसे स्मैक की लत लगवा दी थी। उसके बाद इस लत से गोल्डी को छुटकारा नहीं मिल रहा है।

नशे के प्रति किया जागरूक-

बनबसा में नशा मुक्ति अभियान के तहत पुलिस विभाग द्वारा आज ग्लोरियस एकेडमी में छात्र-छात्राओं को नशे के विरुद्ध जागरूक किया गया। सीओ राजन सिंह रौतेला ने कहा कि नशा व्यक्ति परिवार और समाज के लिए अभिशाप है। आज चरस गांजा अफीम हेरोइन समेत आदि तरह तरह के नशीले पदार्थ अवैध तरीके से लोगों के बीच बेचे जा रहे हैं। दुर्भाग्य से युवाओं में नशे की लत बढ़ती जा रही है। इस अवसर पर एसआई देवेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, राधिका भंडारी, एनआर विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।
मादक पदार्थ लेने के कारण REASONS OF DRUG ABUSE

इसके पीछे निम्न कारण है-

आनन्द पाने के लिए युवा और अधेड़ दोनों वर्गों के लोग इसका सेवन करते हैं। इसके सेवन से कुछ समय के लिए शरीर में ताकत रहती है, मनोबल, आत्मविश्वास बढ़ जाता है। लोगो को इसका प्रयोग उपयोगी लगने लगता है।
आजकल की महंगी जीवनशैली में माता-पिता दोनों ही पैसा कमाने के लिए नौकरियां करने लगे है। वो बच्चो का ख्याल नही रख पाते है। जादातर माता-पिता सुबह घर से निकलते है और रात में घर वापिस आते है। वो बच्चो को जेब खर्च के लिए अधिक से अधिक पैसा देते है जिससे वो ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करने लग जाते है। कई बार बच्चे अपने अकेलापन को दूर करने के लिए नशीले पदार्थों का सेवन करने लग जाते हैं। उन्हें सही तरह का मार्गदर्शन नही मिलने के कारण वो भटक जाते हैं।
अपने दोस्तों के प्रभाव में आकर बच्चे सबसे पहले ड्रग्स लेना शुरू करते हैं। वो इसे शौक-शौक में लेते है पर जल्द ही इसकी लत लग जाती है। कई बच्चे इसको फैशन समझने लगे हैं। अमीर बच्चो में ये समस्या कुछ जादा ही है। ये नशीले पदार्थ बहुत महंगे होते है, पर अमीर घर के बच्चे इसे आसानी से खरीद लेते है।
कुछ लोग अपने दुःख दर्दों, जीवन की समस्याओं से पलायन करने के लिए नशीले पदार्थों का सेवन करने लग जाते है।
कुछ लोग बोरियत, अनिद्रा, गुस्से से बचने के लिए इसका सेवन करते है।

धूम्रपान के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभाव Harmful Health Effects of Smoking
धुम्रपान या सिगरेट स्मोकिंग शरीर के लिए बहुत ही हानिकारक है। धुम्रपान शरीर के इतना खतरनाक है की यह शरीर के लगभग सभी अंगों को नुक्सान पहुंचाता है। इससे शरीर में कई प्रकार की बीमारियाँ होती हैं और स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य धीरे-धीरे ख़राब होने लगता है।



प्रतिवर्ष विश्व के बड़े देशों में लाखों की तगाद में स्मोकिंग करने के कारण लोगों की मृत्यु हो रही है। अगर एक अनुमान लगाएं तो हर 5-6 व्यक्ति में एक व्यक्ति की मौत सिगरेट स्मोकिंग से हो रही है। कुछ ऐसी खतरनाक बीमारियाँ जैसे HIV Aids, दवाइयों का नशा, शराब की लत, और दुर्घटना के साथ धूम्रपान का नशा मिल जाने के कारण इसमें मृत्यु की गिनती बढ़ जाए रही है।

सिगरेट की जगह हुक्का, सिगार या किसी पाइप का इस्तेमाल करने से कोई फर्क नहीं आता है। यह सब इस्तेमाल करने पर भी शारीर को उतना ही हनी पहुंचता है जितना की सिगरेट से। कहा जाता है सिगरेट में लगभग 600 प्रकार के रसायनिक तत्व होते हैं जो लगभग जलने के बाद 7000 प्रकार के हानिकरटीवी में बदल जाता है। उसमे से 70 जहरीले रसायन कैंसर से जुड़े हुए हैं।
आज के युवक ये अपनी तरह से कोशीश करे की केसै छोड़े ये लते।
ड्रग्स के नशे के शिकार लोगो पर एक कविता – खामोश चीख़ | नशा पर कविता
सन्नाटे को चीर रही थी, उसकी चीखें इक रात को,
अँधेरे कमरे से शायद वो आज़ादी चाहता था।
उसकी आवाज़ में कोई इन्क़लाब नहीं था,
जो मांग रहा था वो कोई शबाब नहीं था।
मांग रहा था वो ज़हर जिसका वो आदी था,
खामोश सुन रहे थे सब बस वो ही इक फरियादी था।
टूट रहा था एक-एक अंग उसका,
वो खुद ही कारन था अपनी बर्बादी का।

वो लत उसे उसके दोस्तों ने ही लगवायी थी,
जो लाख चाहने के बाद भी छूट न पायी थी।
हो रहा था तनहा वो अपनों के बीच,
जल रहा था उस आग में जो खुद उसने लगायी थी।

इस कविता से युवक रास्ता में ले यह उम्मीद करते हैं।

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