नौसेना की ‘INS तारासा’ से जुड़ी 5 खास बातें, ऐसे करती है देश के तटों की निगरानी

ल 2017 में भारतीय नौसेना में शामिल निगरानी युद्धपोत आईएनएस तारासा देश की समुद्री सीमाओं की रखवाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

Posted 8 months ago in Other.

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satyam raghuvanshi
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। देश के पश्चिमी तटों की निगरानी और सुरक्षा के लिए डिजाइन किए गए इस जहाज से आपदा राहत कार्यों में भी मदद मिलती है। आईएनएस तारासा की तैनाती सुनिश्चित करती है कि समुद्र के रास्ते कोई दुश्मन देश में दाखिल न हो पाए। नौसेना के इस चौकस समुद्री सैनिक INS तारासा से जुड़ी कुछ खास बातें।

पोत का डिजाइन शानदार
वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा ने पोत के निर्माण में लगे डिजाइनरों, बिल्डरों, इंजीनियरों, पर्यवेक्षको, और अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि पोत का डिजाइन बेहद शानदार है जो इसे तटीय और अपतटीय क्षेत्रों की निगरानी तथा गश्ती की अग्रिम भूमिका निभाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने पोत के चालक दल और युद्धपोत निगरानी टीम, कोलकाता की विशेष प्रशंसा की जिनकी बदौलत पोत के सभी हथियार और सेंसर का सफल परीक्षण सुनिश्चित हुआ। अपनी पहली यात्रा के दौरान पोत ने खराब मौसम में कोलकाता से मुंबई की अपनी पहली यात्रा की जो इसके प्रति अनुकूलता की गवाही देता है।

चौथा और अंतिम पोत
आईएनएस तारासा गार्डन रिच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स(जीआरएसई), कोलकाता द्वारा निर्मित वाटर जैट एफएससी का चौथा और अंतिम पोत है। इस श्रेणी के पहले दो पोतों -आईएनएस तारमुगली और तिहायु को साल 2016 में शामिल किया गया था जो अभी विशाखापत्तपनम में स्थित हैं। जबकि आईएनएस तिलांचांग को 9 मार्च, 2017 को करवर से नौसेना में शामिल किया गया था।

50 मीटर लंबा, 65 किलोमीटर/घंटा गति

आईएनएस तारासा 50 मीटर लम्बा है और यह तीन वाटरजैट्स से संचालित होता है, जो इसे 35 नोट्स (65 किलोमीटर प्रति घंटा) से अधिक की रफ्तार देते हैं। पोत स्वदेशी तकनीक से निर्मित 30 एमएम की बंदूकों तथा कई तरह के हल्के, मध्याम और भारी मशीनगनों की क्षमता से लैस हैं।

आपदा राहत मिशनों के लिए भी आदर्श मंच
पोत तटीय और अपतटीय क्षेत्रों की निगरानी, ईईजैड निगरानी के साथ गैर सैन्य अभियानों जैसे – खोज और बचाव, मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशनों के लिए एक आदर्श मंच है। पोत के कमांडिंग आफिसर लैफ्टिनेंट प्रवीन कुमार हैं।

अंडमान निकोबार के टापू पर रखा गया नाम

इसका नाम अंडमान निकोबार के एक टापू पर रखा गया है। यह भारतीय नौसेना का दूसरा जहाज है, जिसे आईएनएस तारासा का नाम दिया गया है। पहले आईएनएस तारासा ने 1999 से लेकर 2014 तक नौसेना की सेवा की थी। इसे हिन्द महासागरीयय क्षेत्र में भारतीय साझेदारी के प्रतीक के रूप में सेशल्सै तटरक्षक बल को उपहार में दे दिया गया था। नया आईएनएस तारासा का संचालन मुम्बई स्थित पश्चिम नौसेना कमान द्वारा किया जाएगा।

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