पक्षियों की अनोखी दुनिया 

1सतरंगी दुनिया में प्रवेश
2 पक्षियों की अनोखी दुनिया

Posted 7 months ago in Live Style.

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Pawan Malviya
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बच्चों की एक हिंदी पत्रिका के लिए मैं पक्षियों पर एक श्रृंखला कर रहा हूँ. मित्रों और बहुत से बच्चों का आग्रह था कि इसे 'ब्लॉग' का रूप भी दिया जाए. इसी की पूर्ति में प्रस्तुत है पक्षियों की अनोखी दुनिया जो शायद बच्चों के अलावा बड़ों को भी पसंद आये!
1सतरंगी दुनिया में प्रवेश
एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक फुदकती गौरैया या आसमान में ऊंचे चक्कर काटती चील को देखकर किसका मन नहीं चाहता कि काश, हम भी इन पखेरुओं की तरह स्वच्छंद आकाश में जहाँ चाहे वहां उड़ सकते! पक्षियों की उड़ान से प्रेरणा लेकर ही इंसान ने कई साल पहले हवाई जहाज़ का आविष्कार किया था. गरुड़ और शाहब के बारे में जो बात सबसे अधिक रोमांचित और  अचंभे में डालती है, वह है उनका हवा में जहां चाहे वहाँ उड़ सकना। लेकिन हमें पता नहीं होगा कि पंख लगाकर ‘फुर्र’ से उड़ जाने वाले पक्षियों का आसमान और उनका संसार कई तरह की चुनौतियों से भरा है। आकाश में, ज़मीन पर या जल में विचरने वाले ये पक्षी अपने पंखों से लंबी दूरियाँ तय कर भोजन तलाशते हैं। अंडे और बच्चे देते हैं और दूसरे मांस-भक्षी पक्षियों या जानवरों से अपनी जान भी बचाते हैं। प्रकृति के विधान में पेड़ों, पक्षियों, जानवरों और इनके साथ साथ इंसान— सबकी अपनी अपनी जगह है। सबका जीवन एक दूसरे के साथ गुंथा हुआ है और जाने अनजाने में सभी एक दूसरे पर निर्भर भी हैं। इनमें से किसी एक के न रहने से प्रकृति का लाखों वर्षों से साधा हुआ संतुलन बिगड़ सकता है। जब हम अकारण एक पेड़ काटते हैं तो इससे सिर्फ जीवन देने वाली हरियाली ही नष्ट नहीं होती। बल्कि इससे उस पेड़ पर घोंसला बनाने वाले पक्षी,गिलहरियाँ और उन पक्षियों का भोजन बनने वाले कीट-पतंगे,सभी बेघर हो जाते हैं। पेड़ों के कटने का प्रभाव आबोहवा पर भी पड़ता है।    
पृथ्वी पर इतने सारे पेड़-पौधों और जीवों-पक्षियों का मिल जुलकर एक साथ रहना प्रकृति के लाखों वर्षों के विकास का नतीजा है. यहाँ हर एक के लिए पर्याप्त जगह और सबके लिए अपना-अपना विशिष्ट भोजन मौजूद है. इंसान का भी सदियों से इन सारे पेड़-पौधों, पक्षियों और जीवों से गहरा रिश्ता रहा है और हमारी अधिकांश जरूरतें भी इनसे ही पूरी होती हैं।
प्रकृति के विधान में कई बार एक जीव दूसरे जीव का भोजन भी बनता है। जंगल में बाघ  हरिणों से अपना पेट भरता है,आकाश में गरुड़ छोटे पक्षियों का शिकार करता है और पानी में बगुला मछलियाँ मारकर खाता है।       
मांस और मछली खाने वाला मनुष्य भी इस नियम का अपवाद नहीं है। प्रकृति में सभी के लिए पर्याप्त जगह और भोजन है।
दूसरे जीवों की तरह पक्षी भी सदियों से मनुष्य के साथ जीते और रहते आए हैं। वे उसके जीवन का ज़रूरी हिस्सा भी हैं। 
हमारे लिए इन उड़ने वाले साथियों के संसार को समझना और उन्हें पहचानना दिलचस्प होगा। तो आओ, इस शृंखला के जरिये हम इन उड़ने वाले परिंदों के बारे मेँ कुछ नयी बातें जानें और समझें। पक्षियों की यह दुनिया बहुत लुभावनी, चमत्कारी और कभी कभी अचंभे में डालने वाली भी लग सकती है।
हममें से कोई भी, बहुत आसानी से इन पक्षियों का दोस्त बन सकता है। लेकिन बहुत धीरे धीरे, बिना कोई आवाज़ किए,थोड़े से फासले से, ताकि हमारी आहट से ये पक्षी कहीं डर कर उड़ न जाएँ।  
कितने पक्षी?
इस दुनिया में कितने पक्षी होंगे, इसका अंदाज़ लगाना मुश्किल है, लेकिन फिर भी कहा जाता है कि इनकी संख्या हम मनुष्यों से कोई पचास गुना अधिक होगी, यानी कुल साठ अरब या इससे भी अधिक। ये पक्षी दुनिया के हर कोने मेँ हर तरह के मौसम और हर प्रकार की आबोहवा मेँ पाये जाते हैं। प्रकृति ने हर पक्षी को अपने मौसम या अपनी आबोहवा मेँ रह सकने और अपने खास ढंग मेँ जीने के लिए उपयुक्त शरीर, पंख, चोंच और पंजे दिए हैं.
प्रकृति ने इन्हें अपनी रक्षा और शत्रुओं से बचने के उपाय भी दिए हैं. 
इसी प्राकृतिक कवच के सहारे ये पक्षी हज़ारों साल से हमारे बीच में हैं लेकिन यह भी सच है कि अपने आपको बचा न पाने की इस लड़ाई में कई प्रजातियाँ विलुप्त भी हो गयी. बहुत सारे प्रजातियाँ मनुष्य की पर्यावरण से लड़ाई में भी ख़त्म हो गयी.
हमारे समूची दुनिया में पक्षियों की कोई दस हज़ार प्रजातियाँ होंगी. इनमें से कोई 1200 प्रजातियाँ हमारे देश में पायी जाती हैं. हमारे अधिकांश मैदानी इलाकों मेँ पक्षियों की कोई 300 अलग अलग प्रजातियाँ मिल जाएंगी। तुम कहीं भी रहते हो,अपने इर्द गिर्द पक्षियों की कम से कम 100 अलग अलग प्रजातियों को थोड़ी सी कोशिश से ढूंढ ही सकते हो। अगली बार हम अपने पड़ोस के कुछ परिचित और कुछ नए पक्षियों से तुम्हारी पहचान और दोस्ती करवाएँगे


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Pawan Malviya 17 days ago 19 Views
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