प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती के नाम पर सहमति बनने से देश की सबसे वंचित जातियों का भारतीय लोकतंत्र

प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती क्यों हैं मजबूत दावेदार

Posted 6 months ago in News and Politics.

User Image
Shaikh Aejaz
319 Friends
1 Views
15 Unique Visitors
प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती के नाम पर सहमति बनने से देश की सबसे वंचित जातियों का भारतीय लोकतंत्र में विश्वास और दृढ़ होगा. इससे भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी.

आजादी के 70 साल बाद ऐसा पहली बार हो रहा है कि दिल्ली की शीर्ष गद्दी के लिए एक दलित नेता मायावती भी चुनौती पेश कर रही हैं. और ये भी पहली बार हो रहा है कि एक दलित नेता को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश के सबसे बड़े सूबे में पिछड़ों की राजनीति करने वाले राजनेता ने उनका समर्थन किया हो. इशारा अखिलेश यादव की तरफ है जिन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती का समर्थन किया है. दरअसल ये समर्थन सिर्फ पिछड़ी जाति के नेता ही नहीं कर रहे हैं बल्कि जमीन पर पिछड़ी जातियां भी प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती की ताजपोशी के लिए लामबंद हैं.
यूपी में दलित-पिछ़ड़ा-अल्पसंख्यक समीकरण इस बार मायावती को प्रधानमंत्री देखना चाहता है. मायावती ने ऐसी किसी स्थिति में आंबेडकर नगर सीट से उपचुनाव लड़ने के संकेत देकर इस चर्चा को हवा दे दी है. हालांकि प्रधानमंत्री पद का फैसला चुनाव के नतीजों और उसके बाद बनने वाले समीकरणों पर निर्भर होगा, लेकिन ये महत्वपूर्ण की है कि पहली बार लोकसभा चुनाव के दौरान एक दलित प्रधानमंत्री बनने की संभावना चर्चा में है.
दरअसल, दलितों की तरह ही पिछड़ी जातियों की भी इच्छा रही है कि दिल्ली की गद्दी पर पिछड़ी जाति का कोई नेता बैठे. पिछड़ी जातियों की इसी दिली तमन्ना को साल 2014 में भाजपा ने भांप लिया और नरेंद्र मोदी को पिछड़ी जाति के नेता के तौर पर उछालकर पिछड़ों को आकर्षित करने का प्रयास किया. भाजपा का ये प्रयास सफल भी रहा.
पिछड़ी जातियों के भरपूर समर्थन से नरेंद्र मोदी दिल्ली की गद्दी पर बैठ गए. पर पिछड़ी जातियों को पिछड़ी जाति के प्रधानमंत्री से जैसी अपेक्षाएं थी, नरेंद्र मोदी उन अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे बल्कि मोदी ने अपनी सरकार के दौरान पिछड़ी जातियों के हितों का जमकर नुकसान किया.
नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से लेकर लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक पिछड़ी जाति के नेता और अफसरों को शासन-सत्ता में मनवांछित भागीदारी नहीं मिली. इसके अलावा मोदी सरकार ने निजीकरण की आड़ लेकर भी पिछड़ों-दलितों का आरक्षण समाप्त किया और साथ ही नौकरियों में पिछड़ी जातियों के साथ हो रहे भेदभाव ने भी पिछड़ी जातियों को प्रधानमंत्री मोदी के जातीय चरित्र पर संदेह करने को विवश कर दिया. रोस्टर विवाद से नरेंद्र मोदी की पिछड़ा विरोधी छवि मजबूत हुई.
इसी बीच नरेंद्र मोदी पर ये आरोप भी लगे कि वे (मोदी) कागजी पिछड़े या फर्जी पिछड़े हैं. ये आरोप भी लगे कि नरेन्द्र मोदी जन्म से पिछड़े नहीं हैं और उनकी जाति को बाद में ओबीसी लिस्ट में शामिल किया गया. इस बार के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की जाति चुनावी मुद्दा बनी हुई है. बसपा सुप्रीमो मायावती, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार मोदी को कागजी पिछड़ा या फर्जी पिछड़ा बता रहे हैं.
दरअसल, मोदी सरकार में पिछड़ी जातियों की घोर उपेक्षा ने पिछड़ी जातियों को ये सोचने पर विवश कर दिया कि भाजपा ने पिछड़ी जाति के नाम पर नरेंद्र मोदी के रूप में एक पिछड़ा-विरोधी नेता पिछड़ों पर थोप दिया. शासन में पिछड़ों की घोर उपेक्षा से आहत पिछड़ी जातियां अब बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर आशा भरी नजरों से देख रही हैं.
दरअसल पिछड़ी जातियों को ये एहसास है कि मायावती वंचित समाज की नेता हैं और दलित समाज खुद देश में भागीदारी की लड़ाई लड़ रहा है. पिछड़ी जातियों की भी मुख्य लड़ाई शासन-सत्ता में भागीदारी को लेकर ही है, इसलिए पिछड़ी जातियों को ये एहसास है कि जब दलितों-पिछड़ों की लड़ाई एक है, तो उसे एक साथ आना ही पड़ेगा. साथ ही पिछड़ी जातियों में ये समझदारी बन रही है कि सत्ता में भागीदारी के पिछड़ों के सवाल को मायावती आसानी से समझ सकती हैं क्योंकि वो खुद अपने वंचित समाज के लिए सत्ता में भागीदारी की लड़ाई लड़ रही हैं.
देश की दलित जातियों में ये सवाल है कि दलित समाज का कोई नेता भारत का प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकता. इसके अलावा सवाल तो ये भी है कि जब दलित समाज से आने वाले के. आर. नारायणन भारत के राष्ट्रपति बन सकते है, जस्टिस बालाकृष्णन भारत के सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश बन सकते हैं, बाबू जगजीवन राम देश के उप-प्रधानमंत्री बन सकते हैं तो फिर कोई दलित भारत का प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकता.
देश को आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं पर अभी तक देश की 16.6 फीसदी दलित आबादी से कोई भी नेता भारत का प्रधानमंत्री नहीं बना है. प्रधानमंत्री पद के लिए मायावती के नाम पर सहमति बनने से देश की सबसे वंचित जातियों का भारतीय लोकतंत्र में विश्वास और दृढ़ होगा. इससे भारत में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी.
साथ ही, भारत विश्व बिरादरी को भी ये संदेश देने में सफल होगा कि भारत का लोकतंत्र भी अमरीका के लोकतंत्र से किसी भी तरह से कम नहीं है. जब अमरीका के बहुसंख्यक अश्वेत अपने अल्पसंख्यक अश्वेत नेता बराक ओबामा को राष्ट्रपति के तौर पर स्वीकार कर सकते हैं तो भारत भी सबसे कमजोर और वंचित समाज से आने वाली मायावती को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर स्वीकार कर सकता है. ओबामा को अमरीका का राष्ट्रपति चुनकर वहां की गोरी नस्ल के लोगों ने अपने मानवीय होने का सबूत दिया है. अब भारत के सवर्ण समुदाय के समक्ष भी परीक्षा की घड़ी है. क्या भारत का सवर्ण समुदाय भी बसपा सुप्रीमो मायावती की ताजपोशी के पक्ष में खड़े होने की उदारता दिखा सकता है?
Tags: pm,

More Related Blogs

Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 2 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 5 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 2 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 2 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 9 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 5 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 10 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 12 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 11 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 5 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 5 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 2 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 2 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 9 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 11 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 16 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 20 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 9 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 10 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 31 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 5 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 10 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 3 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 5 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 7 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 6 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 34 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 26 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 28 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 204 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 53 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 22 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 8 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 4 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 1 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 2 Views
Article Picture
Shaikh Aejaz 11 months ago 7 Views
Back To Top