फिल्म का नाम: दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर 

सोनिया-राहुल के इटैलियन संवाद वाली दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

Posted 7 months ago in History and Facts.

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Raj Singh
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एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर अनाउंसमेंट के समय से ही चर्चा में है. ट्रेलर आने के बाद से रिलीज तक फिल्म को लेकर ऐसा कुछ नया नहीं है जो हिंदी सिनेमा के पाठक न जानते हों. सिवाय इस बात के कि सोनिया अपने घर में बच्चों के साथ इटैलियन में बात करती हैं. फिल्म संजय बारू की किताब पर आधारित है. लेकिन डिस्क्लेमर में निर्माताओं ने यह भी साफ़ किया है कि सिनेमाई रूपांतरण का सहारा लिया गया है. ये दूसरी बात है कि सिनेमा के डिस्क्लेमर कितने दर्शकों को याद रहते हैं. आइए जानते हैं विजय गुट्टे के निर्देशन में बनी दि एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर कैसी फिल्म है...

फिल्म की कहानी

शुरुआती सीन से ही फिल्म की कहानी का मकसद, उसके किरदार, नायक, खलनायक सब क्लीयर हो जाते हैं. फिल्म 2004 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए को मिली जीत से शुरू होती है. चुनाव में हारने वाली एनडीए किसी भी हालत में सोनिया गांधी (सुजैन बर्नर्ट) को प्रधानमंत्री नहीं बनने देना चाहती. कांग्रेस में दो स्तर की मीटिंग होती है, एक में अहमद पटेल (विपिन शर्मा) सोनिया गांधी, राहुल गांधी (अर्जुन माथुर) और प्रियंका गांधी (अहाना कुमरा) से कमरे के अंदर मंत्रणा करते नजर आते हैं. उसी कमरे के बाहर प्रणब मुखर्जी समेत तमाम नेता नए प्रधानमंत्री को लेकर चर्चा कर रहे हैं. लेकिन बाद में सभी नेता अंदर आते हैं और सोनिया से पद संभालने की गुजारिश करते हैं.
राहुल, पिता और इंदिरा गांधी के साथ हुए हादसों का जिक्र करते हुए सोनिया से पीएम न बनने को कहते हैं. कांग्रेस के सीनियर नेताओं के दबाव पर राहुल उन्हें झिड़कते हैं. मां से संभवत: इटैलियन (अंग्रेजी तो नहीं ही है) में कुछ बात करते हैं और गुस्से में कमरे से बाहर चले आते हैं. प्रणब जैसे नेताओं को लगता है कि संभवत: उनका नंबर आ सकता है. लेकिन सोनिया को वफादार प्रधानमंत्री चाहिए. उनके मन में है भी. जब मनमोहन सिंह (अनुपम खेर) के नाम की घोषणा होती है तो प्रणब मुखर्जी के चेहरे पर शिकन देखने लायक है.

अब मनमोहन को प्रधानमंत्री तो बना दिया गया है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सोनिया को स्थापित करने और पीएमओ पर नियंत्रण के मकसद से अहमद पटेल राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का गठन करवाते हैं. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को इसका अध्यक्ष बनाया जाता है. पीएमओ और सोनिया के बीच तालमेल के लिए सोनिया के पारिवारिक करीबी पुलक चटर्जी को अप्वॉइंट किया जाता है. इस बीच मनमोहन जर्नलिस्ट संजय बारू (अक्षय खन्ना) को अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त करते हैं. फिर मंत्रियों की नियुक्ति से लेकर 2जी, कोयला घोटाले तक की कहानी, परमाणु मसले पर सोनिया के खिलाफ जाकर मनमोहन के इस्तीफे की धमकी और 2009 के चुनाव में राहुल को पार्टी का चेहरा बनाने, 2014 के आम चुनाव से पहले तक कांग्रेस के अंदर की रस्साकशी और तमाम चर्चित राजनीतिक प्रसंग आते हैं. इन्हें जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी.

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