बीजेपी के टिकट पर बालासोर लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले प्रताप चंद्र सारंगी ने गुरुवार को मोदी सर

बीजेपी के टिकट पर बालासोर लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले प्रताप चंद्र सारंगी ने गुरुवार को मोदी सरकार में राज्य मंत्री के पद की शपथ ली.


शपथ ग्रहण समारोह में 56वें नंबर पर जब 64 वर्षीय सारंगी को बुलाया गया तो राष्ट्रपति भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.


64 वर्षीय प्रताप चंद्र सारंगी को लोग

Posted 5 months ago in Other.

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Ravi Pathariya
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बीजेपी के टिकट पर बालासोर लोकसभा सीट से जीत दर्ज करने वाले प्रताप चंद्र सारंगी ने गुरुवार को मोदी सरकार में राज्य मंत्री के पद की शपथ ली.


शपथ ग्रहण समारोह में 56वें नंबर पर जब 64 वर्षीय सारंगी को बुलाया गया तो राष्ट्रपति भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.


64 वर्षीय प्रताप चंद्र सारंगी को लोग 'ओडिशा का मोदी' कहकर बुला रहे हैं. उनके व्यक्तित्व में लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झलक दिखती है.
(तस्वीरें- Sulagna Dash/twitter)


वह पहली बार संसद पहुंचे हैं. हालांकि, सारंगी इससे पहले भी लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं. 2014 में वह इसी सीट से चुनाव लड़े थे लेकिन बीजेडी उम्मीदवार जेना से हार गए थे. वह नीलगिरि विधानसभा सीट से दो बार एमएलए रह चुके हैं. 2004 में उन्होंने बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ा था जबकि 2009 में वह निर्दलीय ही जीते थे.

अपनी साधारण जीवनशैली के लिए मशहूर प्रताप ने बीजेडी के सांसद और करोड़पति उम्मीदवार रबींद्र कुमार जेना को करीब 13000 मतों से हराया है.
इस बार उनका मुकाबला दो करोड़पति उम्मीदवारों से था. राज्य कांग्रेस प्रमुख निरंजर पटनायक के बेटे नवज्योति पटनायक की कुल संपत्ति 104 करोड़ है जबकि बीजेडी सांसद रबींद्र जेना की संपत्ति 72 करोड़ है.
अपने चुनावी एफिडेविट में सारंगी ने अपनी चल संपत्ति 1.5 लाख और अचल संपत्ति 15 लाख घोषित की थी. उनकी आय के स्रोत पेंशन और खेती है.


सारंगी ने जिस अंदाज में चुनाव लड़ा, वह भी बिल्कुल अलग था. जहां, दूसरे उम्मीदवार बड़ी-बड़ी गाड़ियों में बैठकर चुनावी कैंपेन कर रहे थे, वहीं सारंगी ऑटोरिक्शा रैली करते थे. वह प्रोफेशनल मैनेजर्स से ज्यादा अपने पार्टी कार्यकर्ताओं पर निर्भर थे. बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में बिल्कुल खर्च नहीं किया.


चुनाव जीतने के बाद भी उनकी जिंदगी में बहुत बदलाव नहीं आया है. बदन पर सफेद कुर्ता और हाथ में एक झोला लेकर वह लोगों से मिलने निकल पड़ते हैं. जब उन्होंने 2004 और 2009 में विधानसभा चुनाव जीता था, तब भी वह उसी सादगी के साथ जीते रहे.


वह कहते हैं, बचपन से ही मेरी जीवनशैली ऐसी रही है. मेरे सांसद बनने के बाद भी यह बदलने वाला नहीं है. मैं लोगों और देश के लिए काम कर रहा हूं और मैं जीवन भर इसे अमल करता रहूंगा.


ट्विटर यूजर सुलगना दैस ने उनकी तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, इन्होंने शादी नहीं की. इनकी माता का पिछले साल देहांत हो गया है. इनका एक छोटा सा घर है और साइकल से ही घूमते हैं. सारंग का मजबूत जनाधार है.


सारंगी का जन्म नीलिगिरी से सटे गोपीनाथपुर गांव के एक गरीब परिवार में 4 जनवरी 1955 में हुआ. मोदी की तरह सारंगी भी युवावस्था में संन्यासी बनने की राह पर निकल पड़े थे. वह रामकृष्ण मठ भी गए लेकिन साधुओं ने उन्हें मां की सेवा करने की सलाह दी जिसके बाद वह घर लौट गए.


उनकी कई तस्वीरों में मोदी के व्यक्तित्व की झलक मिल जाती है.


वह अपनी जीत का श्रेय भी मोदी को देते हैं. वह कहते हैं, यहां के लोग नरेंद्र मोदी को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते थे. लोगों ने उनके नेतृत्व और बीजेपी की विकास की कोशिशों पर विश्वास किया. बालासोर में उनके आने से मेरे जीतने की संभावनाएं और बढ़ गईं. लोगों ने सांसद के तौर पर सेवा करने की मेरी क्षमता में भी भरोसा जताया.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब ओडिशा पहुंचते हैं तो प्रताप से मुलाकात जरूर करते हैं.


वह कभी जानवरों की सेवा करते हुए नजर आते हैं तो कभी किसी गुफा में साधना में लीन. उनकी इस सादगी के लोग मुरीद हो गए हैं.


सोशल मीडिया यूजर्स उनकी चमक-धमक से दूर सादगी भरी जीवनशैली के कायल हो गए हैं. उनकी तारीफ करते हुए लोगों ने कहा कि देश को ऐसे ही सांसदों की जरूरत है.
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