ब्रह्माजी का अपनी पुत्री से विवाह का असली सच

ब्रह्माजी का अपनी पुत्री से विवाह का असली सच क्या है यह आज भी शोध का विषय है। इस पर विचार किए जाने की जरूरत है।

Posted 7 months ago in Other.

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Poonam Namdev
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भारतीय पौराणिक इतिहास में ब्रह्मा का नाम महत्वपूर्ण रूप से प्रकट होता है, जबकि प्रचलित समाज में विष्णु और शिव को उनसे श्रेष्ठ माना गया है। कालांतर में ब्रह्मा को हाशिए पर धकेल दिए जाने के कई कारणों में से एक है सावित्री का शाप और दूसरा कारण यह कि ब्रह्मांड की थाह लेने के लिए जब भगवान सदाशिव ने विष्णु और ब्रह्मा को भेजा तो ब्रह्मा ने वापस लौटकर सदाशिव से असत्य वचन कहा था।हालांकि प्रचलित समाज में यह धारणा फैली है कि ब्रह्मा ने उनकी पुत्री सरस्वती के साथ विवाह किया था इसलिए उन्हें नहीं पूजा जाता। अब यह कितना सच यह यह तो शोध का विषय है। कुछ विद्वान इसे भ्रांत धारण मानकर खारिज करते हैं। हालांकि सचाई यह भी है कि पुराणों में एक जगह उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मा की पत्नी विद्या की देवी सरस्वती उनकी पुत्री नहीं थीं। उनकी एक पुत्री का नाम भी सरस्वती था जिसके चलते यह भ्रम उत्पन्न हुआ।पौराणिक मान्यता अनुसार ब्रह्मा की पुत्री सरस्वती का विवाह भगवान विष्णु से हुआ था, जबकि ब्रह्मा की पत्नी सरस्वती अपरा विद्या की देवी थीं जिनकी माता का नाम महालक्ष्मी था और जिनके भाई का नाम विष्णु था। विष्णु ने जिस 'लक्ष्मी' नाम की देवी से विवाह किया था, वे भृगु ऋषि की पुत्री थीं।सावित्री, गायत्री, श्रद्धा, मेधा और सरस्वती। इसमें सावित्री और सरस्वती का उल्लेख अधिकतर जगहों पर मिलता है। यह भी मान्यता है कि पुष्कर में यज्ञ के दौरान सावित्री के अनुपस्थित होने की स्थित में ब्रह्मा ने वेदों की ज्ञाता विद्वान स्त्री गायत्री से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया था। इससे सावित्री ने रुष्ट होकर ब्रह्मा को जगत में नहीं पूजे जाने का शाप दे दिया था। गुर्जर इतिहाकार के जानकार मानते हैं कि गायत्री माता एक गुर्जर महिला थी।ब्रह्माजी का अपनी पुत्री से विवाह का असली सच क्या है यह आज भी शोध का विषय है। इस पर विचार किए जाने की जरूरत है। भारतीय पौराणिक इतिहास में ब्रह्मा का नाम महत्वपूर्ण रूप से प्रकट होता है, जबकि प्रचलित समाज में विष्णु और शिव को उनसे श्रेष्ठ माना गया है। कालांतर में ब्रह्मा को हाशिए पर धकेल दिए जाने के कई कारणों में से एक है सावित्री का शाप और दूसरा कारण यह कि ब्रह्मांड की थाह लेने के लिए जब भगवान सदाशिव ने विष्णु और ब्रह्मा को भेजा तो ब्रह्मा ने वापस लौटकर सदाशिव से असत्य वचन कहा था।

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