भारत का एक ऐसा मंदिर, जिसे औरंगजेब के 1000 आदमी मिलकर भी न तोड़ सके

आज हम इस पोस्‍ट मे आपको एक ऐसे किले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे उसकी नक्‍काशी और सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह मंदिर एलोरा में है।

Posted 5 months ago in Other.

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amit nama
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आज हम इस पोस्‍ट मे आपको एक ऐसे किले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे उसकी नक्‍काशी और सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह मंदिर एलोरा में है। इसका नाम कैलाश मंदिर है। यह ऐसी शिल्‍पकला है जिसका तोड़ आजतक नहीं निकल पाया है।
हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं इसे ईंटों और पत्‍थरों से नहीं बल्कि पूरे पहाड़ को ही तराशा गया है। यह पहाड़ इतना मजबूत है कि इसकी एक चट्टान को आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता है। इतिहासकारों के अनुसार इसे बनाने में करीब 4 लाख टन चट्टानों को निकालने की जरूरत पड़ी थी।
आश्‍चर्य इस बात का है कि जिस समय इस मंदिर का निर्माण हुआ उस समय कोई संसाधन भी नहीं थे। आख्रिर इस मंदिर को कैसे तराशा गया
यह बात आज भी खोज का विषय है कि आख्रिर किस मशीन या औजार से इस मंदिर को तराशा गया है। जांच से पता चला कि यह शित मंदिर लगभग 5 हजार साल पुराना है। जब इस्‍लाम और ईसाइयों का नामोनिशान नहीं था।
कहते हैं जब 1682 में देश मुस्लिमों के अधीन था तब औरंगजेब ने कैलाशा मंदिर को नष्‍ट करने की ठानी। इस घ्रणित काम को करने के लिए उसने 1 हजार लोगों को लगाया जिन्‍होनें 3 वर्षों तक तोड़ने का प्रयास किया लेकिन पूरी विफल रहे।आज हम इस पोस्‍ट मे आपको एक ऐसे किले के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे उसकी नक्‍काशी और सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह मंदिर एलोरा में है। इसका नाम कैलाश मंदिर है। यह ऐसी शिल्‍पकला है जिसका तोड़ आजतक नहीं निकल पाया है।
हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं इसे ईंटों और पत्‍थरों से नहीं बल्कि पूरे पहाड़ को ही तराशा गया है। यह पहाड़ इतना मजबूत है कि इसकी एक चट्टान को आसानी से नहीं तोड़ा जा सकता है। इतिहासकारों के अनुसार इसे बनाने में करीब 4 लाख टन चट्टानों को निकालने की जरूरत पड़ी थी।
आश्‍चर्य इस बात का है कि जिस समय इस मंदिर का निर्माण हुआ उस समय कोई संसाधन भी नहीं थे। आख्रिर इस मंदिर को कैसे तराशा गया
यह बात आज भी खोज का विषय है कि आख्रिर किस मशीन या औजार से इस मंदिर को तराशा गया है। जांच से पता चला कि यह शित मंदिर लगभग 5 हजार साल पुराना है। जब इस्‍लाम और ईसाइयों का नामोनिशान नहीं था।
कहते हैं जब 1682 में देश मुस्लिमों के अधीन था तब औरंगजेब ने कैलाशा मंदिर को नष्‍ट करने की ठानी। इस घ्रणित काम को करने के लिए उसने 1 हजार लोगों को लगाया जिन्‍होनें 3 वर्षों तक तोड़ने का प्रयास किया लेकिन पूरी विफल रहे।

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