लोकसभा के चुनाव के बाद लगेगा जनता को झटका

लोकसभा के चुनाव के बाद लगेगा जनता को झटका, पेट्रोल की कीमत में हो सकती है 5.92% की वृद्धि

Posted 5 months ago in Cars and Vehicles.

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Shubhashish Sharma
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लोकसभा के चुनाव समाप्त के बाद आपको पेट्रोल की कीमत में भारी वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के साथ कैलेंडर वर्ष 2019 में भारतीय कच्चे तेल की कीमत लगभग 38% बढ़ गई है, जबकि पेट्रोल की खुदरा कीमतों में नाममात्र की वृद्धि रही है।

लोकसभा के चुनाव के बाद लगेगा जनता को झटका, पेट्रोल की कीमत में हो सकती है 5.92% की वृद्धि

हितधारकों (Stakeholders) का कहना है कि इसका मतलब यह हो सकता है कि अब से लगभग एक महीने में पेट्रोल उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगेगा। भारत के लिए कच्चे तेल की की कीमत 2 जनवरी को 52.43 डॉलर प्रति बैरल थी। 2 मई को यह बढ़कर 72 डॉलर प्रति बैरल हो गई।यह 37.33% की वृद्धि है।हालांकि, इसी अवधि के दौरान, अहमदाबाद में पेट्रोल की कीमत 66.23 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 70.45 रुपये प्रति लीटर हो गई, जो कि सिर्फ 6.37% की वृद्धि थी।इसी तरह, मुंबई में पेट्रोल की कीमत 5.92% बढ़कर 74.3 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 78.7 रुपये प्रति लीटर हो गई।

खुदरा बाजार में पेट्रोल की कीमत में वृद्धि नहीं हुई है क्योंकि सरकार सार्वजनिक आय को चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान जोखिम में नहीं डालना चाहती थी।


10 मार्च से, जब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की गई थी, भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत में 8.43% की वृद्धि हुई है।10 मार्च को क्रूड बास्केट की कीमत 66.4 डॉलर है।इसी समय में, मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 0.86% और अहमदाबाद में 0.84% ​​बढ़ी हैं।

ऑल गुजरात पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद ठक्कर ने कहा जानकारी देते हुए कहा जिस तरह से पेट्रोल की कीमत को नियंत्रित किया जाता है, हमें लगता है कि परिणाम घोषित होने के बाद खुदरा मूल्य में वृद्धि होगी।

अर्थशास्त्री हेमंतकुमार शाह ने कहा कि करों में वृद्धि से, जब वैश्विक तेल की कीमत कम थी, सरकार को इन वर्षों में 16 लाख करोड़ रुपये मिले थे।

ट्रांसपोर्टरों को डर है कि अगर डीजल की कीमत में बढ़ोतरी की जाती है, तो इसका दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों पर व्यापक असर पड़ेगा।गुजरात की ट्रांसपोर्ट कमेटी के चेयरमैन मुकेश दवे ने बताया कि यह न केवल मुद्रास्फीति बल्कि मंदी के कारण भी होगा। इसलिए यदि लागत बढ़ती है और मांग नहीं होती है, तो यह वाणिज्य और उद्योग के लिए बहुत मुश्किल होगा।

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