स्वाइन फ्लू के लक्षण, बचाव के उपाय और इलाज

1 कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बरतें एहतियात
2 गर्भनिरोधक गोलियाें का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं, हो सकती हैं ये परेशानियां

Posted 7 months ago in Live Style.

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Pawan Malviya
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राजधानी दिल्ली के अभी किसी निवासी की स्वाइन फ्लू से मौत नहीं हुई हो, लेकिन राजधानी के अस्पतालों में मौजूदा वर्ष में 69 मरीजों के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं मौजूदा वर्ष में दिल्ली के एक प्रमुख निजी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से जुड़ी 4 मौत के मामले दर्ज किए हैं।

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक राजधानी में मौजूदा वर्ष में स्वाइन फ्लू के 69 मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन दावा किया जा रहा है कि स्वाइन फ्लू से अबतक किसी की जान नहीं गई है।

वहीं सूत्रों की मानें तो गंगाराम अस्पताल में एच1एन1 वायरस से जुड़े चार मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से तीन मौतें अप्रैल में हुई थीं। मई तक अस्पताल में इस रोग के करीब 15 मामले दर्ज किए गए थे। बताया गया कि स्वाइन फ्लू से जिसकी पहली मौत हुई वह ग्वालियर की 65 वर्षीय महिला थी।
महिला की मौत फरवरी की शुरुआत में हुई थी। इसके अलावा अन्य तीन मरीज पुरुष थे और वे दिल्ली से थे। इनमें से एक 35 वर्षीय व्यक्ति की मौत गत 17 अप्रैल को हुई थी। अन्य दो मृतकों की उम्र 58 और 62 वर्ष बताई गई है। वहीं आरएमएल अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो इस वर्ष अस्पताल में स्वाइन फ्लू के महज पांच मामले ही दर्ज हुए हैं। 
कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले बरतें एहतियात
सफदरजंग अस्पताल के सामुदायिक मेडिसीन विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) जुगल किशोर के मुताबिक स्वाइन फ्लू वायरस को लेकर जागरूकता बरतना बेहद कारगर साबित होता है। उन्होंने कहा कि वायरस से बचने के लिए खासतौर से क्रॉनिक बीमारियों से बीमार, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले, सर्दी-जुकाम से पीड़ित, बच्चे और बुजुर्गों को विशेषतौर से सावधानी बरतने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर छींकते-खांसते समय मुंह पर रुमाल जरूर रखें। इसके अलावा दूसरों को भी खांसने, छींकने के दौरान ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। सार्वजनिक स्थान पर थूकने से बचें। साथ ही सर्दी-जुकाम से पीड़ित या संभावित लक्षणों वाले लोगों को सावर्जनिक या भीड़ वाले स्थान पर जाने से पहले नाक और मुंह जरूर ढक लें।

इसके अलावा बस, मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन सेवा का उपयोग करने वाले लोग हाथों में सेनिटाइजर लगा सकते हैं। इसके अलावा घर आने के बाद सबसे पहले मेडिकेटेड गुणों वाले साबुन या लिक्वीड से हाथ साफ करें फिर चेहरा धोएं।

 गर्भनिरोधक गोलियाें का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं, हो सकती हैं ये परेशानियां

क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा (फ्लू वायरस) के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इस वायरस को ही एच1 एन1 कहा जाता है। इसके संक्रमण ने वर्ष 2009-10 में महामारी का रूप धारण कर लिया था। बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 10 अगस्त, 2010 में इस महामारी के खत्म होने का भी ऐलान कर दिया था। अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था।

तब इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से यह मिलता-जुलता था। स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैलता है। कई बार यह मरीज के आसपास रहने वाले लोगों और तिमारदारों को भी अपनी चपेट में ले लेता है। किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखे तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखना चाहिए, स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए।

क्या है स्वाइन फ्लू के लक्षण?

नाक का लगातार बहना, छींक आना

कफ, कोल्ड और लगातार खांसी 

मांसपेशियों में दर्द या अकडऩ 

सिर में भयानक दर्द

नींद न आना, ज्यादा थकान 

दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढऩा

गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना

2 से 9 वर्ष के बीच 89 में से एक बच्चा होता है ऑटिज्म का शिकार

ऐसे करें बचाव : 

 स्वाइन फ्लू से बचाव इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाए है। 

इसका उपचार भी अब मौजूद है। 

 आराम, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना 

शुरुआत में पैरासीटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। 

 बीमारी के बढऩे पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।

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Pawan Malviya 17 days ago 19 Views
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