चन्द्र देव

1. श्रीमद्भागवत के अनुसार चन्द्रदेव महर्षि अत्रि और अनुसूया के पुत्र हैं।
2. इनका वर्ण चमकीला गौर है।
3. इनके वस्त्र, अश्व और रथ श्वेत रंग के हैं। शंख के समान उज्जवल दस घोड़ों वाले अपने रथ पर यह कमल के आसन पर विराजमान हैं।

Posted 2 months ago in Other.

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Arjun Bhuriya
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4 . इनके एक हाथ में गदा और दूसरा हाथ वरमुद्रा में है। इन्हें सर्वमय कहा गया है। ये सोलह कलाओं से युक्त हैं।
5 . भगवान श्रीकृष्ण ने इनके वंश में अवतार लिया था, इसीलिए वे भी सोलह कलाओं से युक्त थे। समुद्र मंथन से उत्पन्न होने के कारण मां लक्ष्मी और कुबेर के भाई भी माने गए हैं। भगवान शंकर ने इन्हें मस्तक पर धारण किया है।

6 . ब्रह्माजी ने इन्हें बीज, औषधि, जल तथा ब्राह्मणों का राजा मनोनीत किया है। इनका विवाह दक्ष की सत्ताईस कन्याओं से हुआ है, जो सत्ताईस नक्षत्रों के रूप में जानी जाती हैं।
7. इस तरह नक्षत्रों के साथ चन्द्रदेव परिक्रमा करते हुए सभी प्राणियों के पोषण के साथ-साथ पर्व, संधियों व मासों का विभाजन करते हैं।

8. इनके पुत्र का नाम बुध है जो तारा से उत्पन्न हुआ है।
9. इनकी महादशा दस वर्ष की होती है तथा ये कर्क राशि के स्वामी हैं। इन्हें नवग्रहों में दूसरा स्थान प्राप्त है। इनकी प्रतिकूलता से मनुष्य को मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। कहते हैं कि पूर्णिमा को तांबे के पात्र में मधुमिश्रित पकवान अर्पित करने पर ये तृप्त होते हैं। जिसके फलस्वरूप मानव सभी कष्टों से मुक्ति पा जाता है।
10. इनका सामान्य मंत्र :- "ॐ सों सोमाय नम:" है। इसका एक निश्चित संख्या में संध्या समय जाप करना चाहिए।


चन्द्र देव
हे आत्मन, चंद्रमा एक ऐसा ग्रह है जिसका सीधा सम्बन्ध मन-मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से है! यह वह ग्रह है जो ध्यान=योग की क्षमता देता है, मन की शांति, आन्तरिक ख़ुशी और एकाग्रता देता है! इस ग्रह का पसंदीदा रंग सफ़ेद और आराध्य देव भगवान् शिव हैं! चन्द्र देव का परम प्रिय दिन सोमवार है!
भारतीय पोराणिक शास्त्रों में निम्नलिखित कार्यों को उल्लेखित किया गया है जिनसे इस ग्रह को शांति मिले और आपको मनवांछित फल! यह कार्य कुछ इस प्रकार हैं:-
· किसी भी सोमवार के दिन, किसी ज़रूरतमंद इन्सान को सफ़ेद कपड़ो का दान करें! (उपरोक्त कार्य सिर्फ तभी करें जब चंद्रमा आपकी कुंडली में नीच हो, यदि चंद्रमा उच्च हो तो सफ़ेद चीजों का दान बिलकुल न करें)
· जितना ज्यादा हो सके “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें
· भगवान् शिव का ध्यान करें
· सोमवार के दिन व्रत रखें
· हर पूर्णिमा को मौनव्रत रखें या जितना हो सके कम बोलें और ईश्वर का ध्यान करें
· किसी भी सोमवार, चांदी में मोती की अंगूठी धारण करें (यदि चंद्रमा कुंडली में नीच हो तो बिलकुल नहीं)
· पूजा करते समय, रुद्राक्ष माला का प्रयोग करें
· आपको लाल चन्दन का तिलक रोज़ माथे पर लगाना चाहिए
· चंद्रमा के वैदिक मंत्र का जाप करें
· आप चंद्रमा के बीज मंत्र का भी जाप कर सकते हैं
नोट: यदि चंद्रमा आपकी कुंडली में अशुभ या नीच हो तो ही दुसरो को चंद्रमा से सम्बंधित चीज़ें दान देना या उपहार देना ठीक है, पर अगर चंद्रमा शुभ हो तो ऐसा बिलकुल न करें! अत: आपसे आग्रह है की हमसे कृपया यह चेक कर लें, क्योंकि कुंडली के प्रतिकूल गलत दान देने से लाभ के स्थान पर कभी कभी कई बड़े नुक्सान हो जाते हैं!
नोट: उपरोक्त कार्य अपने आप में सामान्य सावधानिया या सलाह हैं,
चन्द्र देव को जल तत्व का करक भी माना जाता है! और इसी कारण सागर में ज्वार भाटा और बड़ी बड़ी लहरे उठाने में भी चंद्रमा का एक अहम योगदान होता है! यह साथ साथ सब्जियां और वनस्पति जगत का भी राजा है, यह एक बुद्धिमान ग्रह है! चन्द्र देव ही मन की शांति और भाग्य के फल निर्धारण करने वाले राजा हैं! अपनी प्रभुता यह ग्रह 24 से 25 की उम्र में दिखाता है! इसी ग्रह से व्यक्तित्व में चमक, कामुक, काव्यात्मक गुण, समृधि, उच्च भाग्य, इत्यादि प्राप्त होते हैं! यह ग्रह व्यक्ति को, संवेदनशील, चंचल और गतिशील बनाता है!
चन्द्र देव ही वृद्धि, उपजाऊपन, जनन क्षमता आदि पर राज करते हैं! यही ग्रह बचपन का समय, मस्तिष्क और वक्षस्थल को भी नियंत्रित करता है! इस ग्रह के प्रभाव ही यात्रियों, हलवाई आदि पर होते हैं! चन्द्र देव के मित्र सूर्य, मंगल, और बृहस्पति हैं! जबकि बुध, शुक्र, और शनि इसके शत्रु हैं! इस ग्रह के शुभ प्रभाव हस्त, श्रवण, पुनर्वसु, पूर्व भाद्रपद, रोहिणी और विशाखा नक्षत्र में देखने को मिलते हैं! इसके साथ साथ ही सकारात्मक प्रभाव कृतिका, अश्लेशा, ज्येष्ठा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाड और रेवती नक्षत्र में भी देखने को मिलते हैं!
इस ग्रह का भाग्य रत्न मोती है! यदि यह ग्रह आपका साथ न दे तो जीवन में सफलता मिलना बहुत ही मुश्किल कार्य है! यही ग्रह जीवन के प्रारंभिक वर्षो में व्यक्ति को कमज़ोर करता है और ठण्ड, खांसी, जुकाम , लकवा, टाइफाइड आदि की भी समस्या देता है! चंद्रमा की ठंडी, शीतल किरने औषधियों में प्राण भरती हैं! और इसीलिए शास्त्रों में चंद्रमा को “औषधियों का राजा” भी कहा जाता है! चंद्रमा शुभ होने पर व्यक्ति को स्वास्थ्य और उपलब्धियों की ओर ले जाकर सफल बनाता है!
चंद्रमा का मंत्र
ॐ श्रांम श्रीम श्रौम सः चन्द्रमसे नमः

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