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रिश्ते में उतना ही डूबें जितना तैर सकें

रिश्ते बर्फ के गोले की तरह होते हैं जिन्हें बनाना तो आसान है, लेकिन बनाए रखना काफी मुश्किल। अमूमन रिश्ते को चार

Posted 6 months ago in Natural.

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pranav jadhav
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रि श्ते बर्फ के गोले की तरह होते हैं जिन्हें बनाना तो आसान है, लेकिन बनाए रखना काफी मुश्किल। अमूमन रिश्ते को चार तरह से समझा जा सकता है। रक्त संबंधी, सामाजिक, व्यावसायिक और भावनात्मक। खून के रिश्ते भले ही हमें जन्म से मिल जाते हों, लेकिन उन्हें बनाए रखने के लिए निभाना ज्यादा जरूरी होता है। निभाने से मतलब उन पर ध्यान देना पड़ता है। ध्यान देने से आशय इसमें समय और समझदारी की जरूरत होती है।  मर्यादा तय हो  रिश्ता चाहे खून का हो, सामाजिक, व्यावसायिक या भावनात्मक। हर रिश्ते के लिए एक मर्यादा तय कर लेनी चाहिए। यह मर्यादा भी एकतरफा न होकर दोनों पक्षों को देखते हुए तय करें। इस लिहाज से इस रिश्ते में खुद को इतना ही डुबोएं जितने में तैरना आसान हो। मतलब रिश्तों में जुड़ाव उतना ही रखें, जिसे प्रेमपूर्वक निभा सकें। इससे कोई समस्या नहीं आएगी।  दूरी भी जरूरी  कई बार हम सामने वाले के लिए ज्यादा झुकाव महसूस करते हैं, जबकि सामने वाला हमसे मिलने में कतराता है। ऐसे में हमें भी थोड़ा डिस्टेंस मैंटेन कर लेना चाहिए। कई बार हम समझ नहीं पाते कि हम सामने वाले पर अतिरिक्त बोझ बन रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी दूरी रिश्तों की खोई गर्माहट वापस लाने में कारगर होती है। इस बात को समझें।  पैसे से परेशानी  वर्तमान में सभी रिश्तों का खात्मा करने का सबसे बड़ा कारण पैसा है। वक्त के हिसाब से महंगाई और जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, जबकि इनकम उतनी ही है। ऐसे में अगर कोई और हमसे पैसों की उम्मीद रखता है तो हम उसे पूरी नहीं कर पाते। इसके लिए सबसे जरूरी है रिश्तों में एक दायरा तय कर लेना। जिसमें स्पष्टता जरूरी कारक है। इस बात का ध्यान रखें
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pranav jadhav 6 months ago 19 Views
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