वेल्डिंग मशीन की जानकारी

झलाई या वेल्डन, निर्माण (fabrication) की एक प्रक्रियाहै जो चीजों को जोडने के काम आती है। झलाई द्वारा मुख्यतः धातुएँ तथा थर्मोप्लास्टिक जोड़े जाते हैं। इस प्रक्रिया में सम्बन्धित टुकड़ों को गर्म करके पिघला लिया जाता है और उसमें एक फिलर सामग्री को भी पिघलाकर मिलाया जाता है।

Posted 5 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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झलाई या वेल्डन, निर्माण (fabrication) की एक प्रक्रियाहै जो चीजों को जोडने के काम आती है। झलाई द्वारा मुख्यतः धातुएँ तथा थर्मोप्लास्टिक जोड़े जाते हैं। इस प्रक्रिया में सम्बन्धित टुकड़ों को गर्म करके पिघला लिया जाता है और उसमें एक फिलर सामग्री को भी पिघलाकर मिलाया जाता है। यह पिघली हुई धातुएं एवं फिलर सामग्री ठण्डी होकर एक मजबूत जोड़ बन जाता है। झलाई के लिये कभी-कभी उष्मा के साथ-साथ दाब का प्रयोग भी किया जाता है।

झलाई, दबाव द्वारा और द्रवण द्वारा किया जाता है। लोहारलोग दो धातुपिंडों को पीटकर जोड़ देते हैं यह दबाव द्वारा झलाई है। दबाव देने के लिए आज अनेक द्रवचालित दाबक (Hydraulic press) बने हैं, जिनका उपयोग उत्तरोत्तर बढ़ रहा है। द्रवण द्वारा झलाई में दोनों तलों को संपर्क में लाकर गलित अवस्था में कर देते हैं, जो ठंडा होने पर आपस में मिलकर ठोस और स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं। गलाने का कार्य विद्युत् आर्क द्वारा संपन्न किया जाता है।

विद्युत् आर्क झलाई (Arc Welding)संपादित करें

मुख्य लेख: आर्क वेल्डन

इस विधि में जोड़ी जानेवाली वस्तुओं की टक्करों को गलाने के लिए एक विद्युदग्र (इलेक्ट्रोड) तो झलाई की बत्ती के रूप में होता है और दूसरा उन जोड़नेवाले भागों के रूप में होता है तथा इन दोनों इलेक्ट्रोडों के बीच में विद्युत् आर्क स्थापित कर, आवश्यक ऊष्मा प्राप्त कर ली जाती है। इस काम के लिए दिष्ट और प्रत्यावर्ती किसी भी धारा का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन दिष्ट धारा अधिक सुविधाजनक रहती है।

गैस झलाई (Gas Welding)संपादित करें

मुख्य लेख: गैस वेल्डन

गैसों की सहायता से झलाई की क्रिया एक सी होती है, लेकिन उनका विभाजन उपयोग में आनेवाली गैस के अनुसार किया जाता है। ये गैसें बहुधा जारक (ऑक्सीजन) और शुक्तलेन्य (ऐसीटिलीन (का मिश्रण, कोल गैस और उदजन (हाइड्रोजन) आदि हुआ करती हैं। इनमें से जार-शुक्तलेन्य (ऑक्सी-ऐसीटिलीन) झलाई सबसे अधिक प्रचलित है। वेल्डनो-पयोगी गैसें तैयार करनेवाली व्यापारिक कंपनियाँ इस्पात के मजबूत बेलनों (cylinders) में गैस को कई वायुमंडलों के दबाव पर भरकर झलाई के लिए बेचा करती हैं। झलाई के बड़े बड़े कारखानों में निजी गैस जनित्रों द्वारा चूर्णातु प्रांगेय (कैल्सियम कार्बाइड) और पानी के मिश्रण से यह गैस कम दाबस पर तैयार की जाती है। शुक्तलेन्य को शुक्तला (ऐसीटोन) में घुला देने से उसे विस्फोटन का डर नहीं रहता।

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