ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

भारत में ध्वनि प्रदूषण कई मायनों में मानव जीवन को प्रभावित करने वाली कई बड़ी समस्याओं में से एक बन गया है। हमें ध्वनि प्रदूषण के कारकों, प्रभावों और स

Posted 3 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

भारत में ध्वनि प्रदूषण कई मायनों में मानव जीवन को प्रभावित करने वाली कई बड़ी समस्याओं में से एक बन गया है। हमें ध्वनि प्रदूषण के कारकों, प्रभावों और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण इसके प्रभावों को रोकने के उपायों को जानना चाहिये। स्कूल के बच्चों को सामान्य तौर यह विषय किसी भी प्रतियोगिता में जैसे निबंध लेखन प्रतियोगिता आदि में अपने विचारों को लिखने के लिये दिया जाता है। हम नीचे कुछ आसानी से लिखे ध्वनि प्रदूषण के निबंध विभिन्न समय सीमाओं में उपलब्ध करा रहे हैं। आप अपनी जरुरत और आवश्यकता के अनुसार कोई भी निबंध चुन सकते हैं।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध (नॉइज़ पोल्लुशन एस्से)

You can find below some essays on Noise Pollution in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, 400 and 800 words.

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 1 (100 शब्द)

ध्वनि प्रदूषण को पर्यावरण प्रदूषण के रुप में पर्यावरण को बड़े स्तर पर विभिन्न स्त्रोतों के माध्यम से हानि पहुंचाने वाले तत्वों के रुप में माना जाता है। ध्वनि प्रदूषण को ध्वनि अव्यवस्था के रुप में भी जाना जाता है। अत्यधिक शोर स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होता है और मानव या पशु जीवन के लिए असंतुलन का कारण है। यह भारत में व्यापक पर्यावरणीय मुद्दा है जिसे सुलझाने के लिये उचित सतर्कता की आवश्यकता है, हालांकि, यह जल, वायु, मृदा प्रदूषण आदि से कम हानिकारक है।

बाहरी शोर मशीनों, परिवहन व्यवस्था, खराब शहरी योजना (साइड वाई साइड औद्योगिक और रिहायशी इमारतों का निर्माण) आदि के द्वारा होता है। इंडोर शोर के स्रोत घरेलू मशीनों, निर्माण गतिविधियों, तेज आवाज में संगीत, आदि के द्वारा होता है। ध्वनि प्रदूषण के कारण सबसे ज्यादा हानि कान के पर्दे खराब हो जाने के कारण हमेशा के लिये सुनने की क्षमता का चले जाना है।



ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 2 (150 शब्द)

ध्वनि के सामान्य स्तर को दैनिक जीवन में बनाये रखना बहुत आवश्यक है, हालांकि, अवांछित शोर या ध्वनि जो लोगों, जानवरों या पेड़-पौधों के द्वारा असहनीय होती है पर्यावरण में ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती है। शोर को सामान्यतः कई औद्योगिक या गैर औद्योगिक स्त्रोतों के द्वारा अवांछित आवाज को कहा जाता है जो हमारे चारों ओर दैनिक जीवन में उत्पन्न होती है। उच्च स्तर ध्वनि अप्रिय प्रभाव पैदा करती है और विशेष रूप से कानों के स्वास्थ्य को असुविधा उत्पन्न करती है।

अवांछित आवाज हमारी दैनिक दिनचर्या की गतिविधियों में जैसे; रात को सोना, वार्तालाप करते समय, सुनने की क्षमता, आराम करने, आदि में व्यवधान उत्पन्न करती है। जलीय जीव भी समुद्र में पनडुब्बियों और बड़े जहाजों के द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित होते हैं। जंगली जानवर भी लकड़ी की कम्पनियों के द्वारा चैन-शो संचालन (बहुत ज्यादा शोर उत्पन्न करने वाली) के दौरान उत्पन्न आवाज से बहुत अधिक प्रभावित होते हैं। ध्वनि प्रदूषण के सामान्य स्त्रोत घरेलू गैजेट, परिवहन के साधन, जेट प्लेन्स, हैलिकॉप्टर, औद्योगिक मशीनों से निकलने वाली आवाज आदि है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उद्योगों को अपनी उत्पादन आवाज 75डीबी तक सीमित करनी चाहिये।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 3 (200 शब्द)

ध्वनि प्रदूषण वो प्रदूषण है जो उच्च और असुरक्षित स्तर तक ध्वनि के कारण पर्यावरण में लोगों में बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का, पशुओं, पक्षियों और पेड़ों आदि की असुरक्षा का कारण बनता है। ध्वनि प्रदूषण से होने वाली बहुत ही सामान्य समस्या बीमारी से संबंधी चिन्ता, बेचैनी, बातचीत करने में समस्या, बोलने में व्यवधान, सुनने में समस्या, उत्पादकता में कमी, सोने के समय व्यवधान, थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, घबराहट, कमजोरी, ध्वनि की संवेदन शीलता में कमी जिसे हमारे शरीर की लय बनाये रखने के लिये हमारे कान महसूस करते हैं, आदि। यह लंबी समयावधि में धीरे-धीरे सुनने की क्षमता को कम करता है। ऊंची आवाज में लगातार ढोल की आवाज सुनने से कानों को स्थायी रुप से नुकसान पहुंचता है।

उच्च स्तर की ध्वनि उपद्रव, चोट, शारीरिक आघात, मस्तिष्क में आन्तरिक खून का रिसाव, अंगों में बड़े बुलबुले और यहां तक कि समुद्री जानवरों मुख्यतः व्हेल और डॉलफिन आदि की मृत्यु का कारण बनती है क्योंकि वो बातचीत करने, भोजन की खोज करने, अपने आपको बचाने और पानी में जीवन जीने के लिये अपने सुनने की क्षमता का ही प्रयोग करती हैं। पानी में शोर का स्त्रोत जल सेना की पनडुब्बी है जिसे लगभग 300 माल दूरी से महसूस किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण के परिणाम बहुत अधिक खतरनाक है और निकट भविष्य में चिंता का विषय बन रहे हैं। ध्वनि प्रदूषण के कई निवारक उपाय हैं जैसे, उद्योगों में साउड प्रूफ कमरों के निर्माण को बढ़ावा देना, उद्योग और कारखानें आवासीय इमारत से दूर होनी चाहिए, मोटरसाइकिल के खराब हुये पाइपों की मरम्मत, शोर करने वाले वाहनों पर प्रतिबंध, हवाई अड्डों, बस, रेलवे स्टेशनों और अन्य परिवहन टर्मिनलों का आवासीय स्थलों से दूर होना चाहिए, शैक्षणिक संस्थानों और हॉस्पिटल्स के आसपास के इलाकों को आवाज-निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया जाये, सड़को पर शोर के कारण उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण को अवशोषित करने के लिये रिहायसी इलाकों के आस-पास हरियाली लगाने की अनुमति देनी चाहिये।

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