प्रधानमंत्री राजीव गाँधी (Prime minister Rajiv Gandhi)

31 अक्टूबर 1984 को राजीव गाँधी की माँ इन्दिरा गाँधी को उनके ही सिख बॉडीगार्ड द्वारा मार दिया गया. मौत के कुछ घंटों बाद ही कांग्रेस के सदस्यों से मिलकर

Posted 3 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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31 अक्टूबर 1984 को राजीव गाँधी की माँ इन्दिरा गाँधी को उनके ही सिख बॉडीगार्ड द्वारा मार दिया गया. मौत के कुछ घंटों बाद ही कांग्रेस के सदस्यों से मिलकर काँग्रेस की पूरी बागडौर राजीव गाँधी के कन्धों पर डाल दी. 1981 में आम चुनाव हुए, जिसमें राजीव गाँधी ने 80% सीट अपने नाम की और 40 साल की उम्र में देश के प्रधानमंत्री बन गए.
राजीव गाँधी एक युवा प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने देश की प्रगति में अमिट योगदान दिया. इन्होने देश में संचार क्रांति, कंप्यूटर जैसे विज्ञान को भारत में आरम्भ किया.  राजीव गाँधी ने शिक्षा को हर तरफ से बढाया, एवम 18 वर्ष के युवाओ को मत अधिकार और पंचायती राज को भी शामिल किया. राजीव गाँधी ने कई अहम फैसले लिए, जिसमें श्रीलंका में शांति सेना भेजना,  असम, मिजोरम एवम पंजाब समझौता आदि शामिल था. राजीव गाँधी ने कश्मीर और पंजाब में हो रही आंतरिक लड़ाई को भी काबू में करने की  भरपूर कोशिश की. राजीव देश की युवा शक्ति को अत्याधिक बढ़ावा देते थे, उनका मानना था कि देश का विकास युवाओं के द्वारा ही हो सकता है. देश के युवाओं को रोजगार भरपूर मिले, इसके लिए राजीव गाँधी हमेशा प्रयासरत रहे. राजीव गाँधी ने इसके लिए जवाहर रोजगार योजना शुरू  की.

राजीव गाँधी पर लगे आरोप ( RajivGandhi controversie)-

राजीव गाँधी  स्वयं भ्रष्टाचार विरोधी थे, पर इन पर बोफोर्स कांड के लिए भष्टाचारी होने के आरोप लगे. 1980 और 1990 के बीच काँग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगाया गया, उस वक्त राजीव प्रधानमन्त्री थे. इस घटना में सरकार पर घुस खोरी होने का दावा किया गया. जिसका राजीव के राजनैतिक जीवन पर गहरा आघात पहुंचा  और इसका असर आगामी चुनाव में दिखाई दिया. 1989 में हुए आम चुनाव में राजीव गाँधी को हार का सामना करना पड़ा. राजीव गाँधी ने दो साल तक विपक्ष में रहकर कार्य किया. इनका राजनेतिक जीवन बहुत कष्टदायक था, जिसके साथ वह अपने धेर्यवान स्वभाव के कारण ही न्याय कर पाए, इसलिए इन्हें बहुत प्यार एवम सम्मान मिला.

राजीव गाँधी मृत्यु ( Rajiv Gandhideath) –

श्रीलंका में हो रहे आतंकी मसलो को निपटाने के लिए राजीव गाँधी ने अहम कदम उठाये, जिस कारण इन पर 1991 में हमला किया गया और राजीव गाँधी जैसे महान युवा नेता को भारत ने खो दिया. 21 मई 1991 को राजीव गाँधी की मानव बम द्वारा हत्या कर दी गई थी.  यह पहली बार नहीं था, जब भारत के किसी बड़े नेता को आतंकियों ने मार दिया. यह घटना तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान घटी . इससे पहले भी इन पर जानलेवा हमला किया गया था. इनके परिवार में इन्दिरा और राजीव गाँधी की मृत्यु आतंकियों के कारण हुई, पर संजय गाँधी की मृत्यु आज भी एक सवाल बन कर रह गई .ख़बरों की सुने तो उनकी मृत्यु के पीछे इन्दिरा का नाम जुड़ा पाते है. शायद यही राजनीती की एक गन्दी शक्ल है .

राजीव गाँधी की अकारण हुई मृत्यु से जनता को गहरा आघात पहुंचा, जिसे आज भी याद करके दुःख होता है!

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