Ram Mandir Issue: क्या है राम मंदिर मुद्दा, जानें सबकुछ

23 दिसंबर 1949: भगवान राम की मूर्तियां इस विवादित मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि यहां पर किसी ने मूर्तियां रखी हैं। 

16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी।

Posted 5 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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23 दिसंबर 1949: भगवान राम की मूर्तियां इस विवादित मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुस्लिमों ने आरोप लगाया कि यहां पर किसी ने मूर्तियां रखी हैं। 

16 जनवरी 1950: गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी। उन्होंने वहां से मूर्ति हटाने पर न्यायिक रोक की भी मांग की। 

5 दिसंबर 1950: महंत परमहंस रामचंद्र दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने के लिए मुकदमा दायर किया। मस्जिद को ‘ढांचा’ नाम दिया गया। 

17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया। 

18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया। 

1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने व एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया। इसके लिए एक समिति का गठन किया गया। 

1 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताले दोबारा खोले गए। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी का गठन किया। 

1 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया। 

9 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की अनुमति दी। 

25 सितंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली। इसके बाद कई जगह सांप्रदायिक दंगे भी हुए। 

नवंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सिंह ने लेफ्ट संगठनों और बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई थी। बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद वीपी सिंह ने इस्तीफा दे दिया। 

अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में ले लिया। 

6 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी ढांचा गिरा दिया, जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए। जल्दबाजी में एक अस्थाई राम मंदिर बनाया गया। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया। 

16 दिसंबर 1992: ढांचे की तोड़-फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए एमएस लिब्रहान आयोग का गठन हुआ। 

जनवरी 2002: प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया, जिसका काम विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करना था। 

अप्रैल 2002: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की। 

मार्च-अगस्त 2003: इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं। मुस्लिमों में इसे लेकर अलग-अलग मत थे। 

जुलाई 2005: संदिग्ध इस्लामी आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक जीप का इस्तेमाल करते हुए विवादित स्थल पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया। 

जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी। 

28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का रास्ता साफ कर दिया। 

30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसके तहत विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा दिया गया। इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को मिला। 

9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। 

19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर बाबरी मस्जिद गिराने के लिए उकसाने वाले लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित सात नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया 

5 दिसंबर 2017: सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई एक बार फिर शुरू हुई। 

आपको बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार नई तारीखें दे चुका है। आगामी 29 अक्टूबर से एक बार फिर सुनवाई शुरू होगी। अयोध्या मामले में कुल 19 हजार दस्तावेज हैं। इन तमाम दस्तावेजों को इंग्लिश में ट्रांसलेट किया गया है। साथ ही अदालती बहस की कॉपी (प्लीडिंग) पेश की गई है। दीवानी मामले की सुनवाई में ये दस्तावेज और प्लीडिंग अहम होते हैं। जब मामले की सुनवाई शुरू होगी तो एक-एक पक्षकार अपना पक्ष रखना शुरू करेंगे। इस दौरान मुस्लिम पक्षकारों का स्टैंड भी अहम होगा क्योंकि पिछले साल 5 दिसंबर को जब सुनवाई शुरू हुई थी, तब उनकी ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने ये दलील दी थी कि ये आम जमीन विवाद नहीं बल्कि बेहद अहम मामला है और भारतीय राजनीति पर असर रखता है। बीजेपी के घोषणापत्र में अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की बात है। 

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