पुलवामा हमला: मसूद अज़हर को 'आतंकवादी' क्यों नहीं मानता है चीन?

भारत के पूर्व राजनयिक विवेक काटजू कहते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर को भारत के साथ विश्व के अन्य देश भी चरमपंथी मानते हैं, लेकिन सिर्फ ची

Posted 3 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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भारत के पूर्व राजनयिक विवेक काटजू कहते हैं कि जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर को भारत के साथ विश्व के अन्य देश भी चरमपंथी मानते हैं, लेकिन सिर्फ चीन के वीटो की वजह से मसूद अज़हर हर बार बच निकलता है. वो कहते हैं, ''मसूद अज़हर, वर्षों पहले हरक़त उल अंसार का हिस्सा था. भारत में कश्मीर में पकड़ा गया, जेल की सज़ा हुई. लेकिन साल 1999 में कंधार विमान अपहरण मामले में 160 लोगों की जान बचाने के लिए भारत को मसूद अज़हर को रिहा करना पड़ा." "रिहाई के बाद मसूद अज़हर पाकिस्तान गया. पाकिस्तान में उसका ज़ोरदार स्वागत हुआ. रिहाई के कुछ महीनों के बाद उसने बहावलपुर में अपना संगठन बनाया. पाकिस्तान की सरकार ने उसकी भरपूर मदद की और फिर कश्मीर में उसका इस्तेमाल किया गया." उनका दावा है, "भारत ने ही नहीं, बल्कि अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और भी कई देश भारत की बात से सहमत है. उन्हें भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1267 के तहत मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय चरमपंथी घोषित करने में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन चीन अड़ंगा लगाए हुए है. इसकी एक ही वजह है पाकिस्तान और ख़ास तौर पर पाकिस्तान की सेना." वरिष्ठ पत्रकार सैबल दासगुप्ता मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ भारत के प्रस्ताव पर चीन के वीटो की तीन वजह बताते हैं. वो कहते हैं, "चीन पहली वजह ये बताता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कुछ नियम-कानून हैं जिनका पालन करना होता है. उस हिसाब से जब लिस्टिंग होती है तो हम उस हिसाब से सोचते हैं." दूसरी वजह वो ये बताता है कि मसूर अज़हर के ख़िलाफ़ भारत कोई ख़ास सबूत नहीं दे पाता जिसे हम मान लें, जब सबूत देंगे तब देखेंगे."  तीसरी वजह , चीन ये कहता है कि सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों का इस मामले में भारत को समर्थन हासिल नहीं है. ये अलग बात है कि भारत कहता है कि उसे चीन के अलावा सभी का समर्थन हासिल है." इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता आसिफ़ फ़ारूक़ी कहते हैं कि पाकिस्तान में भारत की तरह इस बात की बहुत चर्चा नहीं होती कि चीन ने भारत के प्रस्ताव पर वीटो कर दिया है. वो कहते हैं, "चीन के वीटो की वजह पाकिस्तान से दोस्ती नहीं, बल्कि उसकी भारत से दुश्मनी है. चरमपंथी गुटों को इसी का फायदा मिलता है. दुश्मन का दुश्मन दोस्त वाली बात है. संयुक्त राष्ट्र में चीन का रवैया यही दिखाता है." 'इतना ज़्यादा विस्फ़ोटक पाकिस्तान से नहीं आ सकता' 100 घंटे के भीतर जैश के आतंकवादियों को मार दिया- भारतीय सेना पुलवामा हमले के विरोध में गालियां देने वाले लोग कौन हैं?

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