महाश‍िवरात्र‍ि पर ऐसे करें महादेव को प्रसन्न...

महाश‍िवरात्र‍ि पर ऐसे करें महादेव को प प्रसन्न

Posted 4 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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शिवरात्रि का परम पर्व स्वयं परमात्मा के सृष्टि पर अवतरित होने की याद दिलाता है. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्री-पुरुष, बालक, युवा और वृद्ध सभी इस व्रत को कर सकते हैं. इस व्रत के विधान में सवेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उपवास रखा जाता है.शिवरात्रि पर सच्चा उपवास यही है कि हम परमात्मा शिव से बुद्ध‍ि योग लगाकर उनके समीप रहे. उपवास का अर्थ ही है समीप रहना. जागरण का सच्चा अर्थ भी काम, क्रोध आदि पांच विकारों के वशीभूत होकर अज्ञान रूपी कुम्भकरण की निद्रा में सो जाने से स्वयं को सदा बचाए रखना है. शिवरात्रि के पर्व पर जागरण का विशेष महत्व है. पौराणिक कथा है कि एक बार पार्वतीजी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, 'ऐसा कौन-सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?'  उत्तर में शिवजी ने पार्वती को 'शिवरात्रि' के व्रत का उपाय बताया. चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं. अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम शुभफलदायी कहा गया है. वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है. परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि कहा गया है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य देव भी इस समय तक उत्तरायण में आ चुके होते हैं तथा ऋतु परिवर्तन का यह समय अत्यन्त शुभ कहा गया है. शिव का अर्थ है कल्याण. शिव सबका कल्याण करने वाले हैं. अत: महाशिवरात्रि पर सरल उपाय करने से ही इच्छित सुख की प्राप्ति होती है. ज्योतिषीय गणित के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चंद्रमा अपनी क्षीणस्थ अवस्था में पहुंच जाते हैं, जिस कारण बलहीन चंद्रमा सृष्टि को ऊर्जा देने में असमर्थ हो जाते हैं. चंद्रमा का सीधा संबंध मन से कहा गया है. अब मन कमजोर होने पर भौतिक संताप प्राणी को घेर लेते हैं तथा विषाद की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे कष्टों का सामना करना पड़ता है. चंद्रमा शिव के मस्तक पर सुशोभित है. इसलिए चंद्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव का आश्रय लिया जाता है. एक कथा यह भी बताती है कि महाशिवरात्रि शिव की प्रिय तिथि है, इसलिए प्राय: ज्योतिषी शिवरात्रि को शिव अराधना कर कष्टों से मुक्ति पाने का सुझाव देते हैं. शिव आदि-अनादि है. सृष्टि के विनाश और पुन:स्थापन के बीच की कड़ी हैं. ज्योतिष में शिव को सुखों का आधार मान कर महाशिवरात्रि पर अनेक प्रकार के अनुष्ठान करने की महत्ता कही गई है. कैसे करें महाशिवरात्रि में पूजा...
हम आपको बताते हैं कि इस दिन शिव की पूजा किस तरह से की जाती है. सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, ऊपर से बेलपत्र,  धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें. हां एक उपाय और बताता हूं, अगर घर के आस-पास में शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर भी उसे पूजा जा सकता है. माना जाता है कि इस दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए. रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ सुनना हरेक व्रती का धर्म माना गया है. इसके बाद अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त किया जाता है. माना जाता है कि यह दिन भगवान शंकर का सबसे पवित्र दिन है. यह अपनी आत्मा को पुनीत करने का महाव्रत है. इस व्रत को करने से सब पापों का नाश हो जाता है. हिंसक प्रवृत्ति बदल जाती है. निरीह जीवों के प्रति आपके मन में दया भाव उपजता है. महाशिवरात्रि को दिन-रात पूजा का विधान है. चार पहर दिन में शिवालयों में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से शिव की अनंत कृपा प्राप्त होती है. साथ ही चार पहर रात्रि में वेदमंत्र संहिता, रुद्राष्टा ध्यायी पाठ ब्राह्मणों के मुख से सुनना चाहिए. सूर्योदय से पहले ही उत्तर-पूर्व में पूजन-आरती की तैयारी कर लेनी चाहिए. सूर्योदय के समय पुष्पांजलि और स्तुति कीर्तन के साथ महाशिव रात्रि का पूजन संपन्न होता है. उसके बाद दिन में ब्रह्मभोज भंडारा के द्वारा प्रसाद वितरण कर व्रत संपन्न होता है. शशास्त्रों के अनुसार, शिव को महादेव इसलिए कहा गया है कि वे देवता, दैत्य, मनुष्य, नाग, किन्नर, गंधर्व पशु-पक्षी व समस्त वनस्पति जगत के भी स्वामी हैं. शिव का एक अर्थ कल्याणकारी भी है. शिव की अराधना से संपूर्ण सृष्टि में अनुशासन, समन्वय और प्रेम भक्ति का संचार होने लगता है. इसीलिए, स्तुति गान कहता है- मैं आपकी अनंत शक्ति को भला क्या समझ सकता हूं. अतः हे शिव, आप जिस रूप में भी हों उसी रूप को मेरा आपको प्रणाम. शिव और शक्ति का सम्मिलित स्वरूप हमारी संस्कृति के विभिन्न आयामों का प्रदर्शक है. हमारे अधिकांश पर्व शिव-पार्वती को समर्पित हैं. शिव औघड़दानी हैं और दूसरों पर सहज कृपा करना उनका सहज स्वभाव है।

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