बजट के बारे में 10 काम की बातें 

बजट की छपाई : बजट पेपर पहले राष्ट्रपति भवन में ही छापे जाते थे, लेकिन 1950 में पेपर लीक हो जाने के बाद से इन्हें मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में

Posted 2 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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बजट की छपाई : बजट पेपर पहले राष्ट्रपति भवन में ही छापे जाते थे, लेकिन 1950 में पेपर लीक हो जाने के बाद से इन्हें मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में छापा जाने लगा। 1980 से बजट पेपर नॉर्थ ब्लॉक से प्रिंट होने लगे। शुरुआत में बजट अंग्रेजी में बनाया जाता था, लेकिन 1955-56 से बजट दस्तावेज हिन्दी में भी तैयार किए जाने लगे। 1955-56 में ही बजट में पहली बार कालाधन उजागर करने की स्कीम शुरू की गई थी। 5. गोपनीयता : बजट छपने के लिए भेजे जाने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है। इस रस्म के बाद बजट पेश होने तक वित्त मंत्रालय के संबधित अधिकारी किसी के संपर्क में नहीं रहते। इस दौरान वे परिवार से भी दूर रहते हैं और वित्त मंत्रालय में ही रुकते हैं। गोपनीयता बरतने के लिए इस दौरान नॉर्थ ब्लॉक में पॉवरफुल मोबाइल जैमर भी लगाया जाता है, ताकि जानकारियां लीक न हो सकें। 6. प्रधानमंत्री द्वारा पेश बजट : 1958-59 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बजट पेश किया, उस समय वित्त मंत्रालय उनके पास था। ऐसा करने वाले वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने। नेहरू के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी और नाती राजीव गांधी ने भी प्रधानमंत्री रहते हुए बजट पेश किया। 7. पहली महिला वित्तमंत्री : पहली महिला वित्तमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी ने 1970 में आम बजट पेश किया  था। उस समय वे देश की प्रधानमंत्री थीं तथा वित्त मंत्रालय का प्रभार भी उनके पास ही था। भारत के इतिहास में वे इकलौती महिला हैं, जिन्होंने आम बजट पेश किया। 8. सर्वाधिक बजट पेश करने का रिकॉर्ड :मोरारजी देसाई ने अब तक सर्वाधिक 10 बार बजट पेश किया है। 6 बार वित्तमंत्री और 4 बार उपप्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने ऐसा किया। इनमें 2 अंतरिम बजट शामिल हैं। अपने जन्मदिन पर 2 बार बजट पेश करने वाले वे एकमात्र वित्तमंत्री रहे हैं। देसाई का जन्मदिन 29 फरवरी को है,  जो कि 4 साल में एक बार ही आता है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी वित्तमंत्री के रूप में 7 बार बजट प्रस्तुत कर चुके हैं। 9. समय बदला : वर्ष 2000 तक अंग्रेजी परंपरा से अनुसार, बजट शाम को 5 बजे प्रस्तुत किया जाता था, लेकिन 2001 में अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने इस परंपरा को तोड़ा और शाम की बजाय सुबह 11 बजे संसद में बजट पेश करने की शुरुआत की गई। दरअसल, यह समय ब्रिटिश संसद के आधार पर तय किया गया था और उनके टाइम के अनुसार भारत ने इसे शाम को 5 बजे पेश करना शुरू किया। पहली बार 11 बजे बजट तत्कालीन वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने पेश किया। शाम 5 बजे बजट पेश करने की प्रथा सर बेसिल ब्लैकेट ने 1924 में शुरू की थी10. ...और फिर बदली तारीख : 2017 से पहले बजट फरवरी माह के अंतिम कार्य दिवस में पेश किया जाता था, लेकिन 2017 से इसे 1 फरवरी या फरवरी के पहले कार्य दिवस में पेश किया जाने लगा। 2017 के बजट से ही केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने रेल बजट को आम बजट में समायोजित कर एक और प्रयोग किया।

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