56 Saal Puraane Plaan Se Kaangres Kee Mushkil Aasaan Karane Mein Jute Raahul

ek dal...do siyaasee kiradaar...aur 56 saal baad khud ko doharaata hua itihaas...tab saal 1963 ka tha

Posted 1 month ago in News and Politics.

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Raj Singh
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एक दल...दो सियासी किरदार...और 56 साल बाद खुद को

दोहराता हुआ इतिहास...तब साल 1963 का था और अब

2019...लेकिन कहानी बिल्कुल एक जैसी...पार्टी भी एक ही-

कांग्रेस... और पूरे मामले के केंद्र में तब भी पार्टी का अध्यक्ष

और आज भी पार्टी का अध्यक्ष ही...तब प्लान था के.

कामराज का और आज प्लान को अंजाम देते दिख रहे हैं

राहुल गांधी...इसीलिए 23 मई के बाद राहुल गांधी अपने

इस्तीफे के साथ कांग्रेस में जिस तरह के बदलावों के रास्ते पर

बढ़ चले हैं उसे कामराज प्लान-2 कहा जा रहा है. आज 15

जुलाई को के. कामराज की जयंती भी है और इस कारण इस

पर चर्चा जरूरी है.

बात 1963 की है, जब 1962 के चीन युद्ध के बाद कांग्रेस

सवालों से घिरी हुई थी.

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई वाली कांग्रेस

सरकार पर विपक्ष के हमले तेज हो रहे थे. चुनाव आने वाले

थे. तब के. कामराज कांग्रेस में नई जान फूंकने के लिए नया

प्लान लेकर आए. इसे कामराज प्लान के नाम से जाना गया.

उन्होंने सुझाया कि पार्टी के बड़े नेता सरकार में अपने पदों से

इस्तीफा दे दें और अपनी ऊर्जा कांग्रेस में नई जान फूंकने के

लिए लगाएं.

क्या था कामराज प्लान?

के. कामराज ने इस योजना के तहत पहले खुद इस्तीफा दिया.

फिर लाल बहादुर शास्त्री, जगजीवन राम, मोरारजी देसाई

तथा एसके पाटिल जैसे नेताओं ने भी सरकारी पद त्याग दिए

. कांग्रेस के 6 कैबिनेट मंत्री और 6 मुख्यमंत्रियों ने अपनी कुर्सी

त्याग दी और पार्टी संगठन में काम करने चले गए. इससे एक

तरफ कांग्रेस संगठन को जहां बड़े और प्रभावी नेता मिले वहीं

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सरकार में अपनी नई टीम

बनाने का मौका भी मिल गया.

के. कामराज अपने इस प्लान की बदौलत केंद्र की राजनीति में

इतने मजबूत हो गए कि पं. नेहरू के निधन के बाद

लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने में

उनकी भूमिका किंगमेकर की रही. वह तीन बार कांग्रेस

अध्यक्ष भी रहे. उन्हें वर्ष 1976 में भारत रत्न से सम्मानित

किया गया.

इसी प्लान पर बढ़ते दिख रहे राहुल

2014 के बाद 2019 के आम चुनाव में भी कांग्रेस को मिली

करारी हार के बाद राहुल गांधी के. कामराज जैसे प्लान पर ही

आगे बढ़ते हुए दिख रहे हैं. 23 मई को आए नतीजों के बाद

हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद

से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद कांग्रेस में नेताओं के इस्तीफों

की झड़ी लग गई. कई प्रदेश अध्यक्ष, महासचिव, सचिव समेत

तमाम नेता राहुल गांधी का अनुसरण करते हुए पार्टी के पदों

से इस्तीफा देने लगे. पार्टी में राहुल से इस्तीफा वापस लेने की

मांग होने लगी. लेकिन राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि अब

वे कांग्रेस अध्यक्ष बने रहना नहीं चाहते.

लेकिन राहुल गांधी इससे भी संतुष्ट नहीं हुए. 25 जून को

राहुल गांधी मीडिया के सामने आए और कहा कि मैं अब

कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं हूं. पार्टी को अपना नया अध्यक्ष चुन

लेना चाहिए. राहुल ने ये भी साफ कह दिया कि अगला

अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होना चाहिए. राहुल गांधी ने

अपने इस्तीफे की 4 पेज की चिट्ठी को सार्वजनिक कर दी. इस

चिट्ठी में राहुल गांधी ने सीधी नाराजगी जताई कि कांग्रेस के

नेताओं को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और ये काफी

पीड़ादायक है

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