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हैवानियत की दास्तां

"आज इंसानों ने हैवानियत की सारी हदे पार कर दी है।"

Posted 1 year ago in People and Nations.

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lookchuper
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आज इंसानों ने हैवानियत की सारी हदे पार कर दी है। आज फिर किसी कि इज़्ज़त जा़र जा़र हुई है, पर इस बार उस हैवानियत का शिकार कोई लङकी, बच्ची या महिला नही बल्कि एक बच्चा हुआ है। जी हाँ! एक सात साल का 'लङका' । क्या कहेंगे अब इस दरिंदगी को हमारे देश के नेता? कि उसने छोटे कपङे पहन रखे थे? या वो नशे मे धूत था? या इस सब मे उस ही की गलती थी? क्योंकि जब किसी लङकी या महिला की आबरु जा़र जा़र होती है तो, यही कहा जाता है कि , उस वक्त उस लङकी के कपङे छोटे थे। तो मान्यवर! मैं आपको बता दूं की, छोटे उस लङकी के कपङे नही है बल्कि छोटी तो आपकी सोच है जो ऐसा सोचती है। जो किसी पीङिता को सहानुभूति नहीं बल्कि गंदी-गंदी गालीयाँ देती है। शर्म आनी चाहिए आप लोगो को, आप जनता के प्रतिनिधि है और आप ही उनका साथ नही दे रहे हैं। ज़रा से पैसों के लिए आप किसी की भी इज़्ज़त दाव पर लगा सकते है। राम रहिम जैसे ढोंगीयों का साथ देते है। यह मत भूलिए ऐसे हैवान दरिन्दगी दिखाने से पहले यह भी नहीं देखते हैं कि वो महिला, लङकी या वृद्धा कौन है? किसकी बेटी है? तो सोच लिजिए कल को आपकी बेटी के साथ ऐसा हो सकता है। क्या पता जिसकी नियत एक बच्ची के लिए सही नही है; वो कल को आपकी बेटी के लिए भी फिसल जाए। तो जागो और गलत को गलत और सही को सही कहना शुरु करो। माना देर तो बहुत हो गई है पर अगर शुरुआत आज भी की जाए तो संभला जा सकता है। वो कहते है ना कि सुबह का भुला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भुला नही कहते। संभल जाइए अब भी और अपने अंदर के इंसान, पिता और एक असली 'मर्द' को जगाइऐ।
 
- दिक्षा जैन
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