मानव शरीर

मानव शरीर एक मानव जीव की संपूर्ण संरचना है, जिसमें एक सिर, गर्दन, धड़, दो हाथ और दो पैर होते हैं। किसी मानव के वयस्क होने तक उसका शरीर लगभग 50 ट्रिलियन कोशिकाओं, जो कि जीवन की आधारभूत इकाई हैं, से मिल कर बना होता है। इन कोशिकाओं के जीववैज्ञानिक संगठन से अंतत: पूरे शरीर की रचना होती है।

Posted 2 months ago in Other.

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Dipika Solanki
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मानव शरीर एक मानव जीव की संपूर्ण संरचना है, जिसमें एक सिर, गर्दन, धड़, दो हाथ और दो पैर होते हैं। किसी मानव के वयस्क होने तक उसका शरीर लगभग 50 ट्रिलियन कोशिकाओं, जो कि जीवन की आधारभूत इकाई हैं, से मिल कर बना होता है। इन कोशिकाओं के जीववैज्ञानिक संगठन से अंतत: पूरे शरीर की रचना होती है।
मन मस्तिष्क और शरीर === मन === जिस मनुष्य का जैसे मन होता है उसका धर्म वैसा होता है कुछ का संस्कृति भी मन के भाव के कारण होता है परन्तु अधिकांश का संस्कृति जन्म परिवार के कारण होता है इसी मन के कारण कोई अच्छा कोई बुरा कोई सामान्य विचारधारा और कर्मो को करने वाला होता है । मस्तिष्क === जो मनुष्य जिस क्षेत्र में अधिक महारात या ज्ञान हासिल कर लेता है उसका समाज में वैसा व्यवसाय रोजगार होता है जैसे जो जिस खेल में महारत हासिल कर लेता है वहां उसका अच्छा खिलाड़ी बन जाता है उसी प्रकार संगीत नाटक चित्रकारी में जो औरों से अच्छा प्रदर्शन करता है वहां उसमें नामी हो जाता है । विभागीय क्षेत्र ये राष्ट्र में शासन व निजी कार्यालय में पद प्राप्त करते है लोग अपने काबिलियत के अनुसार जैसे सामान्य ज्ञान किसी एक क्षेत्र में विशिष्ट ज्ञान वन वातावरण चिकित्सा सुरक्षा की रणनीति ऐसे कई विभाग में लोग अपने काबिलियत के अनुसार अधिकारी व किसी पद पर कार्यरत रहते है । जिन देशो में लोकतंत्र है या राजतंत्र के मंत्री प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री आदि राजनीति पदों पर है वे लोगों को नियंत्रित करना उनके मनोस्थित को समझना उनके भावनाओं को समझने में अधिक कुशल होते है इसलिए वे शासन प्रणाली में देश समाज के लोगों का विकास व उन्नति के लिए उच्च पद पर होते है इन्हें उचित अनुचित का ज्ञान भी अच्छा होता है । व्यापार जो मनुष्य लोगों की जरूरत के वस्तुओं चीज़ों को दे या उनकी आवश्यकता को पूरा करे या उन्हें उचित मूल में उच्च गुणवत्ता की वस्तु दे वहीं एक बड़ा उघोगपति बनता है फिर इसी तरहा धीरे धीरे लघु व्यापारी व किसी एक दुकान का ही व्यापारी होता है । शरीर ___ मनुष्य की उम्र के अनुसार शरीर की स्थिति खानपान रहन सहन व आसपास के वातावरण पर स्वाथ्य पर अच्छा व बुरा प्रभाव पड़ता है ।

मन मस्तिष्क और शरीर की जरूरतें मन को आस्था प्रेम सहानभूति और अपने जैसे अच्छे बुरे सामान्य लोगो का साथ चाहिए मस्तिष्क को ज्ञान चाहिए शरीर को उचित देखभाल चाहिए ये तीनों संतुलित है तो जीवन सुख सुविधा समृद्धि सम्पन्नता प्रतिष्ठा से भर जाता है ।

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