Bachpan की यादे

बचपन जेसा छोटा सबसे अपनी ओर आकर्षित करता है बचपन का जो आंनद होता है

Posted 9 months ago in Entertainment.

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Poonam Namdev
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हम में से अधिकतरों का बचपन गिल्ली-डंडा व गुलाम-डांडा खेलते तथा पतंग उड़ाते बीता है। इन खेलों में जो मानसिक व शारीरिक आनंद आता है, वो कम्प्यूटरजनित खेलों में कहां? ये देसी खेल अब तो आजकल के बच्चों के मनोरंजन से निहायत ही बाहर होते जा रहे हैं, क्योंकि वीडियो गेम, टीवी, कम्प्यूटर व मोबाइल ने इन खेलों की जगह ले ली है। आजकल के बच्चों को फटाफट खेल पसंद हैं। मैदान में खेलने से शारीरिक व मानसिक विकास होता है, जो अब नदारद-सा होता जा रहा है। पहले बचपन में बच्चों की शिक्षा-दीक्षा पट्टी-पेम पर हुआ करती थी। वे पट्टी पर लिख-लिखकर याद करते व मिटाते थे। एक बार गलती होने पर मिटा व सुधारकर फिर से बच्चे को लिखना व पढ़ना सिखाया जाता था। बच्चा इससे सहजता व सरलता से पढ़ना-लिखना सीख जाता था तथा वह माता-पिता को भी कई बार 'पढ़ा' दिया करता था। थोड़े बड़े होने पर बच्चे साइकल सीखने का प्रयास अपने ही हमउम्र के दोस्तों के साथ करते रहे हैं। कैरियर को 2-3 बच्चे पकड़ते थे व सीट पर बैठा सवार (बच्चा) हैंडिल को अच्छे से पकड़े रहने के साथ साइकल सीखने का प्रयास करता था तथा साथ ही साथ वह कहता जाता था 

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