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गूगल क्या है और उसका इतिहास एवं विकास | Google History and Development in hindi

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Ankita

On January 11, 2018, 11:56 pm

गूगल क्या है और उसका इतिहास एवं विकास | Google History and Development in hindi

गूगल क्या है और उसका इतिहास एवं विकास | Google kya hai, History and Development in hindi

इस समय इंटरनेट की दुनिया में कदम रखते ही जो पहला नाम सुनने को मिलता है, वह है गूगल. इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लगभग सभी लोग इस नाम से वाकिफ है और इसका प्रयोग भी विभिन्न तरह से करते हैं, किन्तु बहुत कम लोगों को वास्तविक रूप से ये पता है कि आखिर गूगल है क्या? वास्तविक तौर पर गूगल एक मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी (अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी) कंपनी है, जो इंटरनेट सम्बंधित सर्विस (सुविधाएं) और प्रोडक्ट (उत्पाद) लोगों को सेवा के रूप में प्रदान करती है. इस की सर्विस के अंतर्गत ऑनलाइन एडवरटाइजिंग टेक्नोलॉजी, सर्च क्लाउड कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर आदि आते हैं.



गूगल का इतिहास (History of Google)

गूगल की स्थापना जनवरी 1996 में लैरी पेज और सर्जे ब्रिन की खोज के दौरान हुई. इतना ही नहीं स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से दोनों पीएचडी की पढ़ाई कर रहे थे. इस समय दोनों पीएचडी के विद्यार्थियों ने अपनी शोध में सर्च इंजन के नाम से इसे परिभाषित किया था, जिसके बाद में गूगल का नाम दिया. गूगल शब्द एक अन्य शब्द गूगोल (Googol) से आया है. इस सर्च इंजन के पीछे का (संकल्पना) कांसेप्ट था, एक तरह की दो वेबसाइट के बीच तुलना करना. 1 ‘गूगोल’ में 1 के बाद 100 शून्य स्थापित होता है. आरम्भ में यह सर्च इंजन स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के लिए प्रयोग किया गया और इस विश्वविद्यालय के औपचारिक वेबसाइट के अधीन चलाया गया. वेबसाइट बनाने का तरीका यहाँ पढ़ें.

गूगल का आविष्कार कब हुआ (Establishment of google)

गूगल को आरम्भ में एंडी बेचल्स्हिम्स द्वारा फंडिंग दी गयी, एंडी सन माइक्रोसिस्टम के संस्थापकों में से एक हैं. यह फंडिंग इसे तब दी गयी जब गूगल किसी भी तरह से बाजार में उपलब्ध नहीं था और किसी तरह का धनार्जन नहीं कर रहा था. इसकी सफलता को देखते हुए पुनः तीन और ‘एंजेल निवेशकर्ता’ द्वारा फंडिंग प्राप्त हुई. ये तीन एंजेल निवेशकर्ता थे अमेजन डॉटकॉम के संस्थापक जेफ बेजोस, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के साइंस प्रोफेसर डेविड चेरिटोन, तथा इंटरप्रेन्योर राम श्रीराम. वर्ष 1998 के अंत तथा 1999 के आरम्भ में इस तरह के निवेश के बाद 7 जुलाई 1999 गूगल को 25 मिलियन डॉलर की फंडिंग प्राप्त हुई. इस फंडिंग (निवेश) में कई निवेशकर्ता या इन्वेव्स्टर मौजूद थे. इन बड़े निवेशकर्ता में उद्यम पूंजी फर्म क्लेनर पर्किन्स कॉफ़ील्ड एंड बियरर्स तथा (Sequoia Capita) सेक्वाया कैपिटा शामिल थे.

वर्ष 1999 के आरम्भ में ब्रिन और पेज ने मिलकर यह निर्णय लिया था कि वे एक्साइट  नामक कंपनी गूगल को बेच देंगे. उन्होंने इस कंपनी के सीईओ जॉर्ज बेल से मुलाकात की और 1 मिलियन डॉलर में इसे बेचने का ऑफर दिया, हालाँकि जॉर्ज ने इस ऑफर को ठुकरा दिया. एक्साइट कंपनी के मुख्य निवेशकों में से एक विनोद खोसला ने यह डील हालाँकि 1 मिलियन डॉलर से 750,000 मिलियन डॉलर तक ले आये, लेकिंग जॉर्ज बेल ने इसे फिर भी ठुकरा दिया था.

गूगल की जानकारी (Information or facts about google in Hindi)

गूगल से संबंधित विशेष बातें इस प्रकार है :

गूगल का आईपीओ (initial public offering) वर्ष 2004 में किया गया था. इस प्रोग्राम में Larry Page, Sergey Brin, और Eric Schmidt ने यह तय किया कि ये तीनों एक साथ मिलकर 20 वर्षों तक कार्यरत रहेंगे. अतः 2024 तक ये तीनों एक साथ गूगल कंपनी का संचालन करेंगे.

आईपीओ प्रोग्राम में गूगल की तरफ से 19,605,052 ऑफर शेयर किया गया. प्रति शेयर का मूल्य 85 डॉलर रखा गया. यह शेयर ऑनलाइन एक सर्वर की सहायता से बेचा गया, जिसका निर्माण Morgan Stanley और Credit Suisse ने किया था.

इस शेयर के बिकने से गूगल कंपनी की 23 बिलियन डॉलर से भी अधिक का बाजार पूंजीकरण हुआ. इस समय गूगल के अधीन 271 मिलियन शेयर हैं.

गूगल कंपनी का विकास (progress of google)

गूगल एक ऐसी कंपनी है, जिसने बहुत कम समय में बहुत अधिक विकास किया है. इसके विकास के विभिन्न चरण निम्नलिखित हैं.

मार्च 1999 के समय गूगल ने अपना ऑफिस कैलिफ़ोर्निया के पालो आल्टो में बनाया. इस समय यहाँ पर सिलिकन वैली के अंतर्गत स्टार्ट अप करने वाली बहुत सी कंपनियां इसी समय काम कर रही थीं.

वर्ष 2000 में गूगल ने बेचने एवं प्रचार करने का काम शुरू किया, जिसमें कीवर्ड तकनीकी का प्रयोग किया जाता था. कीवर्ड एर्वटाइज़्मेन्ट सेलिंग का काम सबसे पहले Goto.com के लिए किया गया. यह वेबसाइट आईडियालैब (idealab) का एक स्पिन ऑफ़ था, जिसे बिल ग्रोस ने तैयार किया था.

वर्ष 2001 में अपने पेज रैंक मैकेनिज्म के लिए गूगल को पेटेंट प्राप्त हो गया. औपचारिक तौर पर यह पेटेंट स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय को दिया किया गया, जिसमें इन्वेन्टर के तौर पर लॉरेंस पेज का नाम दिया गया.

वर्ष 2003 में इस कंपनी ने अपना ऑफिसियल कोम्प्लेस 1600 एम्फीथिएटर पार्कवे, माउंटेन व्यू, कैलिफ़ोर्निया में स्थापित किया. इस स्थान को अब गूगलप्लेक्स के नाम से जाना जाता है. गूगलप्लेक्स का इंटीरियर क्लीव विलकिंसन द्वारा बनाया गया है.

वर्ष 2005 में गूगल के थर्ड क्वार्टर लाभ में 700% की बढ़त पायी गयी. इसी तरह 2009 में यह देखा गया कि इस सर्च इंजन में प्रतिदिन 1 बिलियन से अधिक राजनैतिक रिसर्च किये गये. मई 2011 में मासिक तौर पर गूगल विजिटर की संख्या पहली बार 1 बिलियन से ऊपर गयी. यहां आंकड़ा वर्ष 2010 में 931 मिलियन का था.

वर्ष 2012 में गूगल ने 50 बिलियन सालाना कमाई की. ऐसा पहली बार हुआ था कि एक वर्ष में गूगल इतने पैसे कमा सके. वर्ष 2012 के समाप्त होते होते यह देखा गया कि कंपनी वर्ष के प्रति क्वार्टर में अपने लाभ में 8% का तथा सालाना बतौर पर कुल अपने लाभ में 36% की बढ़त कर रही है.

वर्ष 2013 में गूगल ने कैलिको नाम के एक कंपनी का गठन किया, जिसे एप्पल आईएनसी के साथ संलग्न रखा गया. इस वर्ष 27 सितम्बर को गूगल ने अपनी कंपनी का पन्द्रह वर्षीय जश्न मनाया. वर्ष 2016 में अपनी कंपनी के 18 वर्षीय जश्न मनाते हुए गूगल ने अपने वेब ब्राउजर पर डूडल नाम का एक एनीमेशन जारी किया, जिसे विश्व भर के गूगल वेब ब्राउजर पर देखा गया.

गूगल इस समय कई अन्य कंपनियों जैसे फेसबुक,इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट जैसे आर्गेनाईजेशन के साथ मिलकर भी काम कर रहा है. अक्टूबर 2016 तक गूगल ने विश्व भर के 40 देशों में लगभग 70 ऑफिस बना रखे हैं, जहां पर हजारों लोग कार्यरत हैं. गूगल इस समय संसार के सबसे विजिट किया जाने वाला वेबसाइट है. गूगल के अंतर्गत और भी कई सेवाएं जैसे यूट्यूब, ब्लॉगर आदि खूब चलता है. यूट्यूब और उससे पैसे कमाने का तरीका यहाँ पढ़ें.

गूगल डाटा सेंटर कहां हैं (Where is Google data center)

वर्ष 2016 तक गूगल ने पूरे संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में 9 डेटा सेंटर अपने नाम किये हैं और अभी भी चला रहा है. इसके अतिरिक्त एशिया में 2 डेटा सेंटर तथा यूरोप में 4 डेटा सेंटर तैयार कर रखे हैं. दिसम्बर 2013 में गूगल ने यह घोषणा की कि हांगकांग में भी ऐसे डाटा सेंटर का निर्माण किया जाएगा. अक्टूबर 2013 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के नेशनल सिक्यूरिटी एजेंसी ने गूगल डाटा सेंटर के बीच के कम्युनिकेशन का ‘मस्कुलर’ नामक एक प्रोग्राम के तहत अवरोध किया, क्योंकि गूगल अपने नेटवर्क के अन्दर डेटा एन्क्रिप्ट नहीं करता था. इसके बाद वर्ष 2013 से गूगल अपने डेटा सेंटर में भेजे जा रहे डेटा को एन्क्रिप्ट करना आरम्भ कर दिया था.

गूगल का सबसे आसानी से चलने वाला डाटा सेंटर 35 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान पर चलता है. इसका सर्वर अक्सर इतना गर्म होता है कि कोई व्यक्ति एक कुछ क्षणों से अधिक देर तक यहाँ पर खड़ा नहीं रह सकता है. वर्ष 2011 तक गूगल के सभी डाटा सेंटर को मिलाकर कुल 900,000 सर्वर मौजूद थे. यह आंकड़ा ऊर्जा के इस्तेमाल के आधार पर था. हालाँकि गूगल ने कभी इस बात का खुलासा नहीं किया कि उसके पास कुल कितने सर्वर हैं.

दिसम्बर में गूगल ने इस बात का ऐलान किया कि 2017 से गूगल अपने डेटा सेंटर और ऑफिस के लिए 100% रिन्यूएबल एनर्जी या कभी ख़त्म न होने वाली ऊर्जा का प्रयोग करेगा. यदि ऐसा होता है, तो गूगल कंपनी रिन्यूएबल एनर्जी प्रयोग करने वाली विश्व की सबसे बड़ी कंपनी बन जायेगी. इस कंपनी को चलाने के लिए कुल 2600 मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ेगी, जिसकी पूर्ती सौर ऊर्जा तथा वायु उर्जा से बनी बिजली से की जायेगी.

गूगल सर्च इंजन (Google search Engine):

आम लोगों में गूगल की अन्य सुविधाओं का चलन कुछ कम हो भी सकता है, किन्तु गूगल इंजन का प्रयोग हर इंटरनेट प्रयोग करने वाले व्यक्ति के साथ किया जाता है. इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2009 में अमेरिका के मार्केट में गूगल का प्रयोग अन्य सर्च इंजन की तुलना में सबसे अधिक हो रहा था. अमेरिका के बाजार में गूगल का शेयर 65.6% का था.

वर्ष 2003 में न्यूयोर्क टाइम्स ने गूगल इंडेक्सिंग की प्रक्रिया के लिए शिकायत की थी. न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना था कि गूगल का अपने वेबसाइट के लिए इनफार्मेशन कैच करना कॉपीराइट की प्रक्रिया के ख़िलाफ़ है. इस केस में यूनाइटेड स्टेट के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने फिल्ड वी. गूगल के आधार पर गूगल के हक में फैसला किया. पब्लिकेशन ‘द हैकर क्वार्टरली’ के अंतर्गत शब्दों की एक  इवेंटरी (डेटा संग्रालय) बनाई गयी, जो तुरंत सर्च करने की तकनीकी के अंतर्गत इंजन सर्च न कर सके.

जुलाई 2010 में बिंग के आधार पर गूगल ने अपना इमेज सर्च अपडेट किया ताकि स्ट्रीमिंग के दौरान यूजर को इमेज के थंबनेल दिखाई दे सकें. साल 2013 में गूगल सर्च इंजन में हमिंग बर्ड अपडेट की खबर सामने आई. इसके आने से यूजर को ये आसानी हुई कि अब वह आम भाषा में भी कीवर्ड का ध्यान रखे बिना सर्च कर सकता था.

अगस्त 2016 में गूगल ने इसके लिए दो बड़ी घोषणाएं की. पहली घोषणा ये थी कि  गूगल सर्च इंजन से ‘मोबाइल फ्रेंडली’ टर्म को हटाना ताकि हाईलाइटेड पेजेस को मोबाइल पर आसानी से समझा जा सके और दूसरा ये कि जनवरी 2017 से उन सभी मोबाइल पेजेस को हटाया जाएगा प्रच्छन मध्यवर्ती (हिडन इंटरमीडिएट) किस्म के होते हैं. मई 2017 से गूगल अपने सर्च इंजन में ‘पर्सनल टैब’ जैसी चीज लाने वाला था.

गूगल कंस्यूमर सर्विस (google customer services)

गूगल की अपने यूजर के लिए आराम की गयी विभिन्न तरह की सेवाओं का वर्णन नीचे किया जा रहा है. इन सेवाओं में मुख्यतः ऑनलाइन सेवाएँ हैं. कुछ सेवाएँ तो लोगों को पता होती हैं, किन्तु कुछ सेवाएँ आम लोगों से अछूती रह जाती हैं. यहाँ सभी सर्विस यानि की सेवाओं का वर्णन किया जा रहा है.

वेबसाइट पर आधारित सर्विस (google website hosting services)

गूगल ने कई तरह की वेब आधारित सर्विस अपने यूजर के लिए शुरू की है. ईमेल के लिए जी मेल, टाइम मैनेजमेंट के लिए गूगल कैलेंडर, नेविगेशन, सॅटॅलाइट इमेजरी और मैपिंग के लिए गूगल मैप्स, क्लाउड स्टोरेज के लिए गूगल ड्राइव, प्रोडक्टिविटी के लिए गूगल डॉक्स, शीट और स्लाइड्स, फोटो स्टोरेज और शेयरिंग के लिए गूगल फोटोस, नोट टेकिंग प्रक्रिया के लिए गूगल कीप, भाषा ट्रांसलेशन के लिए गूगल ट्रांसलेटर, विडियो देखने तथा साझा करने के लिए यूट्यूब, सोशल साईट के तौर पर गूगल प्लस, एलो, ड्यूओ.

सॉफ्टवेयर पर आधारित सर्विस (service software google)

गूगल ने एंड्राइड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण किया है. इस सिस्टम का प्रयोग करके लगभग सभी मोबाइल कंपनियों ने स्मार्टफ़ोन बनाया और उसका व्यापार किया. इसी के साथ गूगल ने स्मार्टवाच, स्मार्टटेलीविजन, आदि बहुत सी चीज़ें बनायीं. ब्राउजर में गूगल का बनाया हुआ गूगल क्रोम काफी प्रचलित है. इसका एक और वेब ब्राउजर क्रोम ओएस है.

हार्डवेयर पर आधारित सर्विस (google hardware products list)

जनवरी 2010 में गूगल ने नेक्सस ब्रांड के अंतर्गत नेक्सस वन नामक एक स्मार्ट फ़ोन निकाला. वर्ष 2016 में इस ब्रांड का नाम बदल कर पिक्सेल रख दिया गया. हार्डवेयर सम्बंधित इसके अन्य सर्विसेज का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

वर्ष 2011 एक नए प्रकार के कंप्यूटर के तौर पर क्रोम बुक लॉन्च किया गया. यह कंप्यूटर क्रोम ओएस के अंतर्गत कार्य करता था.

वर्ष 2013 में गूगल ने क्रोमकास्ट नामक एक डोंगल का आविष्कार किया. इस डोंगल की सहायता से कोई यूजर अपने मोबाइल फ़ोन में निहित कंटेंट को टीवी पर चला सकता था.

जून 2014 में गूगल ने गूगल कार्डबोर्ड का ऐलान किया. इसके प्रयोग से कोई वर्चुअल रियलिटी मीडिया का आनंद उठा सकता था. अप्रैल 2016 में ये खबर आई कि गूगल के अपने हार्डवेयर डिवीजन को चलाने के लिए मोटोरोला मोबिलिटी के पहले अध्यक्ष रह चुके रिक ओस्टरलो को नियुक्त किया है.

इसके बाद गूगल की हार्डवेयर सम्बंधित कई चीज़ें लॉन्च की गयी. इस समय पिक्सल और पिक्सल एक्सएल स्मार्ट फ़ोन, गूगल होम, डेड्रीम व्यू वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, गूगल वाईफाई लॉन्च की गयी.

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (google internet service)

वर्ष 2010 के फरवरी के महीने में गूगल ने गूगल फाइबर प्रोजेक्ट की घोषणा की. ताकि अल्ट्रा हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाया जा सके. इस नेटवर्क के तहत 50,000 – 500,000 लोगों को इंटरनेट सुविधा देने की योजना थी.

कालांतर में यह प्रोजेक्ट गूगल के ‘अल्फाबेट आईएनसी’ के हाथों सौंप दिया गया. अप्रैल 2015 में गूगल ने ‘प्रोजेक्ट-फाई’ की घोषणा की. यह एक मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर था, जो वाई फाई तथा सेलुलर सिग्नल को एक साथ चल सकता था, ताकि यूजर को अधिक स्पीड की इंटरनेट सुविधा प्राप्त हो सके.

भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशन पर सितम्बर 2016 में गूगल ने पब्लिक वाई-फाई स्थापित करने का मन बनाया है. गूगल के इस प्रोजेक्ट से लगभग 3.5 मिलियन लोग प्रति महीने भारत में इंटरनेट सेवा का लाभ उठाते हैं. इस वर्ष के दिसम्बर तक भारत के 100 प्रमुख रेलवे स्टेशन पर यह सुविधा लागू कर दी गयी थी. यह संख्या आगे और भी बढ़ने वाली है.

गूगल पर विवाद (criticism of google)

बहुत कम समय में बहुत अधिक विकास के कारण इस कंपनी पर कई लोगों की आलोचना का शिकार होना पडा. कई लोगों के आरोप आदि सच भी हुए हैं. गूगल सबसे अधिक जिन बातों के लिए आलोचना का पात्र हुआ वह हैं, अत्याधिक टैक्स अवॉयडेंस, न्युत्रलिटी सर्च, कॉपीराइट, सेंसरशिप और जेंडर डिस्क्रिमिनेशन. गूगल हालाँकि अमेरिका की पांच सबसे बड़ी कंपनियों में अपना नाम दर्ज कराया है किन्तु इन पांचो कंपनियों में सबसे कम टैक्स देने वाली कंपनी यही है.

गूगल पर यह भी आरोप है कि यह अपने यहां काम करने वाली स्त्रियों को पुरुषों से कम पैसे देता है. इस तरह से गूगल के ऊपर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं.

गूगल के अनजाने सच (facts about google company in hindi)

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गूगल के 40 देशों में ऑफिस बने हुए हैं. इन ऑफिस के अंतर्गत प्रोडक्ट रिसर्च तथा डेवलपमेंट ऑपरेशन के भी कई कार्य किये जाते हैं. गूगल मैप डेवलपमेंट का कार्य सिडनी तथा एंड्राइड डेवलपमेंट का कार्य लन्दन में किया जाता है.

नवम्बर 2013 में गूगल ने लन्दन में एक नए गूगल हेडक्वार्टर बनाने की योजना बनायी. इसका कैंपस 1 मिलियन वर्ग फीट में फैली हुई थी, जिसमें 4,500 कर्मचारी कार्य कर सकते थे. जून 2017 में एक नए हेडक्वार्टर का प्लान कैम्डेन कॉउन्सिल के अंतर्गत जमा किया. यदि यह प्लान अप्रूव्ड हो जाता है तो, इस कैंपस के अन्दर रूफ़ गार्डन, स्विमिंग पूल, स्पोर्ट के लिए गेम्स एरिया आदि बनाया जाएगा.

मई 2015 में गूगल ने भारत के हैदराबाद में अपना कैंपस बनाने का इरादा बनाया था. यदि हैदराबाद में यह कैंपस बनाया जाता है, तो यह कैंपस अमेरिका के बाहर गूगल का सभी से बड़ा कैंपस होगा. इस कैंपस में कम से कम 13,000 लोगों को रोजगार प्राप्त हो सकेगा.

गूगल विश्व भर के लगभग सभी त्यौहार और सभी महान लोगों के जन्मदिन तथा पुण्य तिथि को अपने ब्राउजर पर अनोखे तरीके से मनाता है, जो लोगों को काफी पसंद आता है,

अतः जिस गूगल का हम अपने मोबाइल में प्रयोग करते हैं उसके निर्माण, संचालन आदि के पीछे कई लोगों की मेहनत शामिल होती है. आज के अधिकतर युवा गूगल में नौकरी करने के सपने देखते हैं.

दरअसल गूगलप्लेक्स की शान और समृद्धि देख कर कोई भी व्यक्ति इस कंपनी में काम करना चाहेगा, किन्तु यहाँ नौकरी पाना आसान नहीं है. यह एक मल्टीनेशनल कंपनी है अतः यहाँ पर हाई-प्रोफाइल एजुकेशन के बाद ही नौकरी मिलनी संभव हो पाती है.

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