Haeekort Ne Jaaree Kiya Raajy Soochana Aayog Ko Notis

jodhapur, 15 julaee (udayapur kiran). soochana ka adhikaar kaanoon ke tahat prastut parivaad ko kaalaateet bataate hue bina sune lautaane ke maamale mein daayar rit yaachika par sunavaee karate hue raajasthaan haeekort ne raajy soochana aayog ko notis jaaree kar javaab talab kiya hai.

Posted 2 months ago in People and Nations.

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Raj Singh
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जोधपुर, 15 जुलाई (उदयपुर किरण). सूचना का अधिकार

कानून के तहत प्रस्तुत परिवाद को कालातीत बताते हुए बिना

सुने लौटाने के मामले में दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते

हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को नोटिस जारी

कर जवाब तलब किया है.

जैसलमेर निवासी एक परिवादी का परिवाद लौटाने पर

राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजाक के. हैदर और पंकज

साईं ने इसे हाईकोर्ट में रिट याचिका के माध्यम से चुनौती देते

हुए कहा कि सूचना आयोग सूचना का अधिकार कानून की

मूल भावना के विपरीत कार्य कर रहा है. सूचना का अधिकार

अधिनियम, 2005 की धारा 18 (1) के तहत प्रस्तुत होनe

वाले परिवादों के लिए अधिनियम में कोई समय-सीमा तय

नहीं है.

राज्य सूचना आयोग अपनी मनमर्जी से इस अधिनियम के

दायरे से बाहर जाकर 180 दिनों की अवधि के बाद प्रस्तुत

परिवादों को कालातीत बताकर बिना सुनवाई किए लौटा रहा

है. आयोग के इस रवैए से अनगिनत परिवादियों और

अपीलार्थियों से सुनवाई का अवसर छीना जा रहा है, जो कि

उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है.

याचिकाकर्ता के वकील हैदर का कहना है कि सूचना आयोग

को प्रस्तुत किसी भी अपील अथवा परिवाद पर दोनों पक्षों को


सुनवाई का पर्याप्त अवसर देते हुए उसका निस्तारण करना

चाहिए. अधिनियम में परिवाद के लिए कोई समय-सीमा

निर्धारित नहीं की गई है. इसका अर्थ साफ है कि सूचना का

अधिकार के किसी उपबंधों का उल्लंघन होने पर कोई भी

नागरिक कभी भी शिकायत अथवा परिवाद सुनवाई के लिए

प्रस्तुत कर सकता है. आयोग को उस पर सुनवाई के बाद

गुणावगुण के आधार पर उसका निस्तारण करना चाहिए. आयोग द्वारा निर्धारित कोई भी नियम अथवा परिपाटी मूल

अधिनियम के विपरीत नहीं हो सकती. मुख्य सूचना आयुक्त

द्वारा दिनांक 16 जनवरी 2012 में लिया गया निर्णय मूल

अधिनियम की व्यवस्था में परिवर्तन करने में सक्षम नहीं है. जिसका उल्लेख करते हुए परिवादों को बिना सुने ही लौटाया

जा रहा है.

प्रारम्भिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस डॉ. पुष्पेन्द्रसिंह भाटी ने राज्य सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय

विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्थान राज्य सूचना आयोग के सचिव, पंचायत समिति जैसलमेर के विकास

अधिकारी और पिथला ग्राम पंचायत के ग्राम सचिव को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं.

जैसलमेर जिले की पिथला ग्राम पंचायत के गांव पडियारी की ढाणी निवासी लतीफ खान ने अपनी ग्राम पंचायत में एक

आरटीआई दायर कर जनहित में विकास कार्य सम्बन्धित सूचनाएं चाही थी. सूचना नहीं मिलने पर अंतत: द्वितीय अपील

दायर की गई, जिसमें राज्य सूचना आयोग ने आवेदक को सूचनाएं उपलब्ध करवाने के आदेश दिए. आदेश का पालन

नहीं होने पर आवेदक ने आयोग में परिवाद पेश किया. जिसे आयोग ने बिना सुने ही कालातीत बताते हुए लौटा दिया.

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