INGLAIND MEIN KRIKET KEE MAUT KEE KHABAR SE NIKALA ESHEJ

Pratidvandvita Ka 137 Saal Puraana Itihaas

Posted 2 months ago in .

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Raj Singh
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इंग्लैंड अपनी मेजबानी में विश्व चैंपियन बनने के बाद एशेज

की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है। इंग्लैंड और

ऑस्ट्रेलिया के बीच एक अगस्त से 16 सितंबर के बीच यह

सीरीज खेली जाएगाी। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जाने वाली यह सीरीज कई सालों से खेली जा रही है। दोनों के

बीच यह 71वीं एशेज श्रृंखला होगी। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहली बार यह यह सीरीज साल 1877 में मेलबर्न

क्रिकेट ग्राउंड पर खेली गई थी, लेकिन क्या आपको मालूम है कि दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित टेस्ट सीरीज का नाम

एशेज क्यों और कब पड़ा

ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान इंग्लैंड को पहली बार दी थी मात

इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच साल 1882 में लंदन के केनिंग्टन ओवल के मैदान पर टेस्ट मैच खेला गया। जिसमें

ऑस्ट्रेलिया ने मेजबान इंग्लैंड को सात रन से मात दी।

इंग्लिश सरजमीं पर कंगारुओं की यह पहली जीत थी।

इस हार के बाद ब्रिटिश अखबर स्पोर्टिंग टाइम्स के पत्रकार

शिर्ले ब्रूक्स ने इस खबर को इस हेडिंग से छापा थी कि, 'शोक समाचार, इंग्लिश क्रिकेट को याद करते हुए इतना ही

कहना चाहूंगा कि 29 अगस्त 1882 को ओवल ग्राउंड में इसकी मौत हो गई है। इसे चाहने वाले दुख में हैं। इंग्लिश

क्रिकेट मर गया, उसके अंतिम संस्कार के बाद ऐश (राख) ऑस्ट्रेलिया भेज दी जाएगी।' ऐश का मतलब होता है राख।

हेडलाइन के गर्भ से नाम निकला एशेज


इंग्लैंड में क्रिकेट की मौत वाली हेडलाइन के गर्भ से नाम

निकला एशेज, जो आज दुनिया में छाया है और उसके

रोमांच में स्टेडियम में चिल्लाते दर्शक ये बताते हैं कि क्रिकेट

ऐश बनकर ऑस्ट्रेलिया नहीं गया बल्कि आग की तरह विश्व

के कई देशों में पहुंचकर लोकप्रियता की सारी हदें पार कर

ली। जब इस हार के बाद उसी साल इंग्लैंड की टीम

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई और 2-1 से सीरीज को अपने नाम किया, तब इस जीत को इंग्लैंड में ऐश (राख) वापस लाने के

रूप में बताया गया। यहीं से दोनों देशों के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज को एशेज कहा जाने लगा।

घर में मिली हार का बदला इंग्लिश टीम ने इवो ब्लीग की अगुआई में लिया था। क्रिसमस से एक दिन पहले शाम को

उन्होंने मेलबर्न के बाहर एक प्रदर्शनी मैच खेला। वहां उन्हें

ऑस्ट्रेलिया में एशेज जीतने के प्रतीक के रूप में एक महिला ग्रुप ने कलश दिया था। इसी जगह वह फ्लोरेंस मर्फी से पहली

बार मिले थे, जो 1884 में उनकी पत्नी बनी। दोनों कलश के साथ जल्द ही इंग्लैंड लौट आए। 

मरने से पहले जताई थी यह इच्छा


इसके 43 साल बाद ब्लीग की मृत्यु हो गई, लेकिन दुनिया छोड़ने से पहले उन्होंने कलश को मेलबर्न क्रिकेट क्लब को

देने की इच्छा जताई थी। उनकी पत्नी फ्लोरेंस ने ऐसा ही

किया। इसके बाद से ही इस कलश को एशेज ट्रॉफी के रूप में मान्यता प्रदान की गई। वह कलश एमसीसी के म्यूजियम में

रखा गया, उसकी प्रतिकृति को एशेज सीरीज के दौरान ट्रॉफी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

2001 के बाद इंग्लैंड की जमीन खेले गए चारों एशेज में

कंगारू टीम को हार का सामना करना पड़ा है। यह दोनों देशों के बीच ओवरऑल 71वीं सीरीज है। ऑस्ट्रेलिया ने 33

जबकि इंग्लैंड ने 32 बार एशेज का खिताब अपने नाम किया

है। 65 सीरीज का रिजल्ट निकला है।पांच सीरीज ड्रॉ रही हैं। इंग्लैंड में खेली गई पिछली चार सीरीज में ऑस्ट्रेलिया की

टीम सिर्फ 4 मैच जीत सकी है। इंग्लैंड ने 10 मैच जीते हैं और 6 मुकाबले ड्रॉ रहे।

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