Kashmeer Mein Hogee Lephtinent Karnal Mahendr Sinh Dhaunee kee trening

Raanchee Ke Kriketar Aur Praadeshik sena Mein lephtinent karnal mahendr sinh dhaunee kee aarmee trening ka jyaada samay jammoo-kashmeer mein beetega

Posted 2 months ago in Live Style.

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Raj Singh
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रांची के क्रिकेटर और प्रादेशिक सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र

सिंह धौनी की आर्मी ट्रेनिंग का ज्यादा समय जम्मू-कश्मीर में
बीतेगा। थलसेना प्रमुख विपिन रावत ने धौनी की ट्रेनिंग का

आग्रह स्वीकार कर लिया है। धौनी अपनी 106 इंफैंट्री बटालियन के साथ ही जुड़े रहेंगे। यह बटालियन पैराशूट

रेजिमेंट के तहत है। सेना ने स्पष्ट किया है कि धौनी इस दौरान

सेना के किसी अभियान का हिस्सा नहीं बनाए जाएंगे। उनकी

दो माह की ट्रेनिंग अगस्त माह में शुरू होगी। इसके लिए धौनी

ने तैयारी प्रारंभ कर दी है।

महेंद्र सिंह धौनी कश्मीर में इसलिए रहेंगे, क्योंकि उनकी 106

इंफैंट्री बटालियन कश्मीर में स्टैटिक ड्यूटी के लिए तैनात है।


इस बटालियन का मुख्यालय बेंगलुरु है। बता दें कि वर्ल्ड कप

के बाद से ही धौनी के संन्यास को लेकर कई तरह की खबरें

चल रही थीं। लेकिन वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम इंडिया के चयन की बैठक के बाद मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद नe

धौनी के संन्यास की खबरों को खारिज कर दिया है।

धौनी के भविष्य को लेकर चीफ सिलेक्टर प्रसाद ने दिया ये बड़ा बयान


'धौनी जानते हैं कि उन्हें संन्यास कब लेना है' 


भारतीय टीमों की घोषणा करते हुए एमएसके प्रसाद ने कहा

कि संन्यास का फैसला पूरी तरह निजी होता है और महेंद्र सिंह

धौनी जैसे लीजेंड जानते हैं कि उन्हें कब संन्यास लेना है।


धौनी ने अगले महीने होने वाले वेस्टइंडीज दौरे से खुद को

अलग कर लिया था और इस बात को उन्होंने बीसीसीआई को सूचित कर दिया था। विंडीज दौरे के लिए टीम की घोषणा की

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसाद ने धौनी के लिए कहा, 'संन्यास पूरी

तरह एक खिलाड़ी का अपना फैसला है। धौनी जैसे लीजेंड

जानते हैं कि उन्हें संन्यास कब लेना है। मुझे नहीं लगता है कि

इस मामले पर और बात करने की जरूरत है। पहली बात तो

यह है कि वह उपलब्ध नहीं हैं और दूसरा हमने युवा

खिलाड़ियों को तैयार करना शुरू कर दिया है।'

सेना आकर्षित करती है माही को

एमएस धौनी ने कुछ बार कहा भी है कि अगर वह क्रिकेटर न

बने होते तो शायद सेना में चले जाते। उनका किट बैग भी कई

बार सेना के कलर का होता है। ऐसी ही टीशर्ट भी पहनते हैं।

उन्होंने अपने ग्लव्स में बलिदान बैज लगाया था। एक बार

हरमू स्थित उनके आवास पर रास्ते से गुजरते कुछ सैनिक रुके। पता चलने पर धौनी ने अपना काम छोड़कर उनको घर

पर बुला लिया।

क्या है प्रादेशिक सेना

प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) नियमित सेना के बाद

दूसरी लाइन की सेना है। इसमें भारतीय नागरिक अपनी इच्छा

से आते हैं। उनको जरूरत पड़ने पर देशसेवा के लिए उपलब्ध

होने की स्वीकृति देनी होती है। इसमे वेतन नहीं मिलता। साल

में एक से दो माह की ट्रेनिंग इससे जुड़े लोगों को दी जाती है।

अगर इनको सेवा के लिए बुलाया जाता है तो ये सेना को

स्थैतिक दायित्वो में मदद करती हैं। लगभग दो लाख लोग

प्रादेशिक सेना में इस समय हैं.

2015 में एक माह की ट्रेनिंग ले चुके हैं माही 


एमएस धौनी पहली बार सेना में ट्रेनिंग नहीं लेंगे। अगस्त

2015 में धौनी एक माह की ट्रेनिंग आगरा के पैरा प्रशिक्षn

स्कूल में स्पेशल फोर्स के साथ कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने

पाराट्रूपर के तौर पर उत्तीर्ण होने के लिए पांच पैरा जंप भी पूरे

किए थे। पांचवीं जंप 1250 फीट ऊपर से उन्होंने लगाई थी।

धौनी को तब सेना द्वारा एक जिप्सी गाड़ी उपलब्ध कराई गई

थी। उन्होंने उस ट्रेनिंग में हथियार चलाने का भी प्रशिक्षण

लिया था। वह रोजाना सुबह चार बजे उठ जाते थे।

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