Paakistaan Se 26 Saal Baad Phir Registaanee Tiddiyon Ka hamala

26 saal baad ek baar phir ghusapaithie ke roop mein registaanee tiddiyon ka bada samooh daakhil ho gaya hai . 

Posted 2 months ago in Gaming.

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Raj Singh
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नयी दिल्ली, 14 जुलाई :भाषा: पाकिस्तान की सीमा से लगे

राजस्थान के जैसलमेर-बाड़मेर इलाके में 26 साल बाद एक

बार फिर 'घुसपैठिए' के रूप में 'रेगिस्तानी टिड्डियों' का बड़ा

समूह दाखिल हो गया है । वर्ष 1993 में पाकिस्तान से आयी

टिड्डियों ने भारतीय क्षेत्र में किसानों की फसलों को भारी

नुकसान पहुंचाया था ।

हालांकि इस बार सरकार का दावा है कि इन रेगिस्तानी टिड्डियों

से फसल के नुकसान का कोई साक्ष्य नहीं मिला है । भारतीय

क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से रेगिस्तानी टिड्डियों के हमले का

विषय लोकसभा में भी उठ चुका है। आरएलपी के हनुमान

बेनीवाल द्वारा किए गए एक सवाल के संबंध में कृषि एवं

किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया था कि

पाकिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों से मुख्य रूप से राजस्थान के

जैसलमेर जिले में 21 मई 2019 के बाद से निम्न एवं मध्यम

सघनता में रेगिस्तानी टिड्डियों का आक्रमण हो रहा है ।

राजस्थान के बाड़मेर और जालौर जिलों और गुजरात के

बनासकंठा जिलों में भी इनकी मौजूदगी देखी गई है । उन्होंने

बताया कि अब तक रेगिस्तानी टिड्डियों से फसल के नुकसान

का कोई साक्ष्य नहीं है । न तो रेगिस्तानी टिड्डी नियंत्रण टीमों ने

और न ही किसी राज्य के कृषि कर्मियों ने फसलों के नुकसान

की कोई खबर दी है । राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत

भी इस पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं और उन्होंने हर तरह की

सतर्कता का भरोसा दिया है । प्रदेश का कृषि विभाग मुस्तैद

दिख रहा है। कृषि विभाग का कहना है कि उसने अभी तक 3

हजार 288 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डियों को बेअसर किया है ।

कृषि विभाग के टिड्डी नियन्त्रण दल की अब तक की कार्रवाई

के बाद भी पश्चिमी राजस्थान पूरी तरह इस खतरे से मुक्त नहीं

हुआ है । समझा जाता है कि इस विषय पर पिछले दिनों

भारत और पाकिस्तान के टिड्डी नियन्त्रण दल की एक बैठक

भी हुई है । गौरतलब है कि भारत में थार के रेगिस्तान में वर्ष

1993 के पश्चात रेगिस्तानी टिडि्डयों का यह सबसे बड़ा

हमला माना जा रहा है। उस समय टिडि्डयों के बड़े समूहों पर

कीटनाशक का छिड़काव करवा कर इन्हें नियंत्रित किया गया

था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, टिडि्डयों के समूह बड़ी संख्या में

अफ्रीका में पैदा होते हैं। इसके बाद ये अपने भोजन की

तलाश में निकल पड़ते हैं। नमी वाले क्षेत्रों में ये अंडे देते हैं

और इनसे बहुत तेजी के साथ टिड्‌डे निकलते हैं। इस तरह

इनकी संख्या लगातार बढ़ती जाती है। टिड्‌डी समूह फसलों

पर हमला करता है और देखते ही देखते पूरी फसल को नष्ट

कर देता है।

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