Sonbhadra Narasanhaar

priyanka gaandhee ko agar prashaasan peediton se nahin milaata to..

Posted 3 months ago in News and Politics.

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Raj Singh
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प्रियंका गांधी पिछले 24 घंटे से एक्शन में हैं और देश की

मीडिया प्रियंका को लगातार कवरेज भी दे रही है.

सोनभद्र गोलीकांड के बहाने ही सही प्रियंका गांधी यूपी

कांग्रेस में जोश भरने की कोशिश की है.

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की

यूपी की राजनीति में जोरदार तरीके से वापसी हुई है. प्रियंका

गांधी पिछले 24 घंटे से एक्शन में हैं और देश की मीडिया

प्रियंका को लगातार कवरेज भी दे रही है. सोनभद्र गोलीकांड

के बहाने ही सही प्रियंका गांधी यूपी कांग्रेस में जोश भरने की

कोशिश की है. लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं

में जो मायूसी छाई हुई थी, वह सोनभद्र गोलीकांड के बाद से

फिर से जागृत हो गई है.

सोनभद्र नरसंहार के पीडि़तों से मिलने की जिद पर अड़ीं

प्रियंका गांधी के सामने यूपी प्रशासन लाचार और बेबस नजर

आ रही है.

बता दें कि शनिवार को मिर्जापुर जिला प्रशासन ने अपने पुराने

रुख में नरमी बरतते हुए प्रियंका गांधी को 2 पीडि़त परिवारों

के प्रतिनिधि से मुलाकात करवाई. दो पीड़ित परिवारों से

मुलाकात के बाद भी प्रियंका गांधी नाराज हैं. प्रियंका गांधी ने

जिला प्रशासन पर आरोप लगाया, '15 पीड़ित परिवारों में से

सिर्फ 2 लोगों को ही मुझसे मिलाया गया है. पीड़ित परिवारों

को गेट के बाहर ही रोका दिया गया है. इतना बड़ा हादसा

हुआ है. आदिवासियों की जमीन को छीनने की कोशिश हुई

है. इस घटना की पूरी जिम्मेदारी यूपी सरकार की है.'

प्रियंका गांधी शुक्रवार से ही सोनभद्र नरसंहार में मारे गए लोगों

के परिजनों से मिलने की जिद पर अड़ी थीं. इस दौरान वह

लगातार दोहरा रही थीं कि वो बिना मिले वापस जाने वाली

नहीं हैं. प्रियंका गांधी का साफ कहना था कि प्रशासन चाहे तो

पीडि़तों और उनके परिजनों को चुनार ले आये या फिर कहीं

और मिलवा दे.

यूपी में चल रहे इस राजनीतिक धटनाक्रम पर देश के जाने

-माने वकील और एनसीपी नेता माजिद मेनन न्यूज 18 हिंदी

के साथ बातचीत में कहते हैं, 'पीड़ितों से मिलने के लिए

विरोधी पार्टियों के नेताओं को रोका नहीं जा सकता है. अगर

प्रशासन रोक लगा रही है तो इसका मतलब है कि प्रशासन

खुद वहां की कानून व्यवस्था संभालने में विफल साबित हुई

है. प्रियंका गांधी को अगर मिलने से रोका जा रहा है तो यह

सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक है.' 

सुप्रीम कोर्ट के ही एक और अधिवक्ता रविशंकर कुमार न्यूज

18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'लॉ-एंड-ऑर्डर को

बनाए रखने के लिए प्रशासन के पास अधिकार है कि वह धारा

144 लागू कर दे. धारा 144 लागू करने के बाद आप किसी

से मिल नहीं सकते हैं. वहां पर भीड़ इकट्ठी नहीं हो सकती है

और न ही कोई राजनीतिक बयानबाजी ही की जा सकती है.

हां, अगर किसी को लगता है कि प्रशासन उनके साथ

नाइंसाफी कर रहा है क्योंकि वह एक विशेष राजनीतिक वर्ग

से आते हैं तब वह राजनीतिक पार्टी या नेता हाईकोर्ट में रिट

याचिका दाखिल कर सकते हैं.'

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