VISHNU NE MAATA PAARVATEE KA ROOP

Shimala Aur Dillee Ke Teen Shraddhaaluon Kee Maut

Posted 2 months ago in .

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Raj Singh
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न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला



श्रीखंड महादेव यात्रा में तीन श्रद्धालुओं की मौत की खबर है।

हालांकि मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। बताया

जा रहा है कि इन तीन श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत

हुई और फिर उन्होंने दम तोड़ दिया। भीमवही, नैनसरोवर और कुशां में अलग-अलग जगहों पर इनकी मौत हुई है।

प्रशासन हाइपोथर्मिया (शरीर के तापमान में कमी होना) को इनकी मौत की वजह मान रहा है। दो श्रद्धालु दिल्ली के और

एक शिमला का रहने वाला है। मृतकों की पहचान उपेंद्र सैनी उम्र 40 साल पुत्र जीवन सैनी निवासी खलीणी शिमला केवल

नंद भगत पुत्र गोपाल भगत निवासी ए 577 चोखरी वेस्ट


दिल्ली और आत्मा राम पुत्र खाशा राम निवासी गली चेतराम मोजपुर दिल्ली पुलिस स्टेशन शाहदरा के रूप में हुई है

।एसडीएम आनी चेत राम ने बताया कि श्रीखंड महादेव की

यात्रा के अंतिम पड़ाव में शनिवार देर रात डेढ़ बजे के करीब तीन लोगों की मौत हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस और

प्रशासन की टीम ने शवों को बैस कैंप सिंहगाड़ पहुंचा दिया है।

सबसे कठिन मानी जाने वाली श्रीखंड महादेव की ऐतिहासिक यात्रा 15 जुलाई से शुरू हुई थी। 25 जुलाई को यात्रियों के

अंतिम जत्थे का पंजीकरण किया गया था। उसके बाद यात्रा

बंद कर दी गई थी। ऐसे में प्रशासन पर भी यह सवाल उठता है कि जब यात्रा बंद कर दी गई तो श्रद्धालु कैसे चले गए।

इसके लिए पुलिस पोस्ट स्थापित की जानी चाहिए थी ताकि


श्रद्धालुओं को यात्रा पर जाने से रोका जा सके। निरमंड के बेस कैंप सिंहगाड़ से यह यात्रा शुरू होती है। श्रद्धालु 18,570

फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड चोटी पर बाबा भोले नाथ के

दर्शन के लिए 35 किलोमीटर की जोखिम और रोमांच भरी पैदल यात्रा में आठ ग्लेशियर पार करते हैं। सिंहगाड़ में


पंजीकरण और मेडिकल चेकअप के बाद ही श्रद्धालु आगे


जाते हैं।

पिछले वर्ष गई 4 श्रद्धालुओं की जान पिछले वर्ष श्रीखंड

यात्रा पर गए कुल 4 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। एक की

हृदय गति रुकने और अन्य की ऑक्सीजन की कमी से जान

गई थी। एसडीएम चेत सिंह ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है

कि बिना मेडिकल चेकअप यात्रा पर न जाएं।

श्रीखंड का पौराणिक महत्व 


श्रीखंड की पौराणिक मान्यता है कि भस्मासुर राक्षस ने अपनी

तपस्या से शिव से वरदान मांगा था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रखेगा, वह भस्म होगा। राक्षसी भाव होने के

कारण उसने माता पार्वती से शादी करने की ठान ली।

इसलिए भस्मापुर ने शिव के ऊपर हाथ रखकर उसे भस्म

करने की योजना बनाई, लेकिन भगवान विष्णु ने उसकी

मंशा को नष्ट किया।



विष्णु ने माता पार्वती का रूप धारण किया और भस्मासुर को

अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य के दौरान भस्मासुर ने अपने सिर पर ही हाथ रख लिया और भस्म हो

गया। आज भी वहां की मिट्टी और पानी दूर से लाल दिखाई

देते हैं।
Tags: Mahadev Yatra, ,

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